UP : गाजीपुर के मुहम्मदपुर कुसुम की राजभर बस्ती में शादी की खुशियों का मेला सजा था। लेकिन सालियों की ठिठोली और जूता छुपाई की रस्म एक पूरे रिश्ते पर भारी पड़ गई। मरदह थाना क्षेत्र के बिजौरा गांव से आई बारात का बड़े ठाठ-बाट से स्वागत हुआ। द्वारपूजा से लेकर सात फेरे तक हर रस्म हंसी-खुशी निभाई गई। दूल्हा-दुल्हन के चेहरे पर नई जिंदगी के सपने झिलमिला रहे थे। गांव की औरतें मंगलगीत गा रही थीं और बच्चे पटाखों की आवाज में मस्त थे। इसी बीच आई शादी की सबसे चुलबुली रस्म, जूता चोरी। सालियों ने दूल्हे का जूता छिपा लिया और नेग की मांग शुरू कर दी। पहले तो माहौल हंसी-मजाक से गुलजार रहा, लेकिन अचानक दूल्हे का मिजाज बदल गया। आरोप है कि वह गुस्से में आपा खो बैठा और गलत बर्त्ताव करने लगा। दुल्हन पक्ष के लोगों ने दूल्हे के व्यवहार को देखकर उसकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठा दिये। देखते ही देखते हंसी-ठिठोली तीखी बहस में बदल गई। गांव के चौपाल से लेकर दरवाजे तक एक ही चर्चा होने लगी, “क्या बेटी को ऐसे घर भेजना सही होगा?” बात इतनी बिगड़ गई कि वधू पक्ष ने साफ शब्दों में विदाई से इनकार कर दिया। बारात रोक ली गई। माहौल तनावपूर्ण हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाने में जुट गई। घंटों पंचायत चली, रिश्तेदारों ने समझाया, गांव के बुजुर्गों ने भी बात संभालने की कोशिश की, लेकिन दुल्हन पक्ष अपने फैसले पर अड़ा रहा। आखिरकार वो पल भी आया, जब शहनाइयों की धुन उदासी में बदल गई। बारात बिना दुल्हन के लौट गई। अब वर पक्ष कोतवाली के चक्कर काट रहा है। लड़के वालों का कहना है कि अगर युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ होता, तो निजी कंपनी में नौकरी कैसे करता? उधर, लड़की पक्ष अपनी बेटी को ससुराल भेजने को तैयार नहीं है। पुलिस ने दोनों पक्षों को काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन लड़की पक्ष फिलहाल विदाई कराने के लिये राजी नहीं हुआ।
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