Bihar : शाम ढलने को थी, इस्लामपुर के बरडीह गांव की हवाओं में नमी नहीं, बारूद की बू तैर रही थी। गांव के बाहर खंधा में कुछ परछाइयां धीरे-धीरे साजिश का आकार ले रही थीं। 29 राउंड गोलियों की तड़तड़ाहट से जब गांव थर्रा उठा, तब सबने जाना कि लौट आया है, कुख्यात गुंडा लाल बादशाह। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी, लाल बादशाह, जिसने सालों तक इस्लामपुर की गलियों में दहशत बोई, आज अपने 10 साथियों के साथ फिर एक बड़ी वारदात की तैयारी में है। गश्त पर निकली पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी। चार बदमाश उनमें खुद लाल बादशाह भी पकड़ में आ गया। लेकिन तभी, जंगल की तरह घने हो चुके खंधा में अचानक गूंज उठी मशीनगनों की आवाज। अंधाधुंध फायरिंग के बीच पुलिसकर्मियों ने जान हथेली पर रखी, मगर लाल बादशाह… अपने साथियों की गोलियों की आड़ में फिर एक बार अंधेरे की गोद में समा गया। दरोगा और सिपाही बाल-बाल बचे, लेकिन सवाल छोड़ गया, आख़िर कौन है वो ताक़त, जो हर बार लाल बादशाह को बचा लेती है? पुलिस अब सघन सर्च ऑपरेशन चला रही है, इलाके की नाकेबंदी हो चुकी है, मगर गांववालों की आंखों में वही पुराना डर लौट आया है।
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