Kohramlive Desk : अपने और बेगाने से खुद की जान को खतरे में देख किलानुमा घर में रहनेवाले ठेकेदार वीरेंद्र ठाकुर उर्फ गोरख की खोपड़ी उड़ा दी गई। उनके गर्दन में भी गोली मारी गई। ठेकेदार की हिफाजत में तैनात तीन प्राइवेट बॉडी गार्ड भी मौके से फरार हो गये। घटना को अंजाम देने से पहले परिवार के अन्य लोगों को एक कमरे में बंद कर दिया गया। सबसे हैरत और चौंकाने वाली बातें यह है कि गोली मारने वाले पुलिस की वर्दी में थे। तीनों शूटरों का चेहरा सीसीटीवी में कैद हुआ है। करीब तीन साल पहले यानी वर्ष 2019 में ठेकेदार वीरेंद्र पर एक बार जानलेवा हमला किया गया था। तब से वह डरा-डरा सा अपने किलानुमा घर में रहते थे। वहीं अपनी हिफाजत के लिये प्राइवेट बाडी गार्ड रखे थे। बिना इजाजत घर के अंदर किसी के आने जाने पर रोक थी। खुद ठेकेदार घर के अंदर लगे कैमरे को निहारते रहते थे। पहली बीवी से झगड़ा होने के बाद अलग हो गया था। दूसरी बीवी खुशबू ने पुलिस को बताया कि वीरेंद्र सिर्फ दीवाली में ही घर से निकलता था। कोई जरूरी काम होने पर ही घर से निकलता था। उसके साथ हर वक्त सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते थे। यह दुस्साहसिक वारदात यूपी के लखनऊ में नीलमथा में दिन दहाड़े हुई। घटना को अंजाम देने के बाद हत्यारे बड़े आराम से भाग निकले। घटना की खबर मिलते ही मौके पर पहुंचे कई छोटे बड़े पुलिस अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया।
वारदात को लेकर शुरूआती जांच में जो बातें सामने आई है, उसके अनुसार घर के लोगों ने पुलिस को दिये अपने बयान में बताया है कि बदमाश पुलिस की वर्दी में आये थे। इनके दो साथी सफेद पैंट, टीशर्ट में आर्मी की गोल कैप लगाये थे। बदमाशों ने ठेकेदार के परिवार और गार्डो को बंधक बना लिया। वर्दी पहने बदमाशों को देखते ही दुकानदारों ने समझा कि GST की टीम आ गई तो दुकानदार शटर डाउन करने लगे, लेकिन बदमाश इधर-उधर देखे बिना आगे बढ़ते गए और वीरेंद्र ठाकुर के घर की तरफ जाने वाली गली में घुस गये। गार्डो की बंदूकें भी कब्जे में ले ली थीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार वीरेंद्र रेलवे का बड़ा ठेकेदार था। कोलकाता से लेकर यूपी तक उसके पास करोड़ों के ठेके थे। वह बिहार के बेतिया का रहनेवाला था। बिहार में वांटेड था। उसके खिलाफ बिहार में कई मामले दर्ज है। दागी किस्म के ठेकेदार वीरेंद्र की हत्या के लिए उसके विरोधी ठेकेदार ने अपनी बेटी से वीडियो कॉल करवाकर उसे हनीट्रैप में फंसाया था। दो लड़कियों को भेजकर उसे चारबाग के एक होटल में बुलाया गया था। होटल पहुंचने से पहले ही उसपर गोलियों की बौछार कर दी गई थी। एक गोली उसकी रीढ़ की हड्डी में लगीं और वह अपाहिज हो गया। इस केस में पुलिस ने दो महिलाओं सहित एक इंजीनियरिंग छात्र को गिरफ्तार किया था। वीरेंद्र तीन साल पहले हुए हमले के बाद से खुद की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा हो गया था। उसने पूरे घर को एक किलानुमा बनवा लिया। घर के दरवाजे और दीवारों में जगह तक नहीं छोड़ी। वहीं चारदीवारी पर कंटीले कील लगवा रखे थे। ताकि कोई अंदर न दाखिल हो सके। घर के अंदर से लेकर बाहर तक हर तरफ सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछा रखा था। वह लगातार अपने कमरे में बैठकर खुद ही कैमरों में आने जाने वालों पर नजर रखता था।






