UP : बरेली के बहेड़ी में बुधवार को जब घर की देहरी पर सज रही थी शहनाई, जब हलवाई के कढ़ाहों से उठ रही थी मिठास की खुशबू, जब गांव की गलियों में नाचने को बेताब थे रिश्ते-नाते, तभी किस्मत ने ऐसा खेल रच दिया कि दुल्हन के हाथों की मेंहदी सूखने से पहले ही सबकुछ खत्म हो गया। देवीपुरा की बेटी, शांति, जिसका नाम ही उसके स्वभाव की तरह शांत और सरल था। बुधवार को उसकी शादी थी। नवाबगंज से बारात आने वाली थी। पंडाल सज चुका था, हलवाई खाना परोसने को तैयार थे, लेकिन दोपहर के तीन बजे शांति की तबीयत बिगड़ने लगी। उल्टी… घबराहट… और फिर बेचैनी। अंधविश्वास और जल्दीबाज़ी में उसे लेकर शेखूपुर के एक झोलाछाप डॉक्टर के पास गये— तस्नीम उर्फ भूरा, जिसने दावा किया, “कमजोरी है, ड्रिप चढ़ा दो… सब ठीक हो जायेगा। ”ड्रिप चढ़ाई गई… लेकिन राहत की जगह, शांति की हालत और बिगड़ गई। रेफर किया गया, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। भोजीपुरा के अस्पताल पहुंचने से पहले ही शांति की सांसें थम चुकी थीं। उसका जोड़ा अधूरा रह गया, मेंहदी बेरंग और पंडाल शोक का डेरा बन गया। बारात, जो देवीपुरा की ओर रवाना हो चुकी थी, आधे रास्ते से लौटा दी गई। जिस घर में रात को गीत बजने थे, वहां अब बस सिसकियों की आवाज है। गांव रो रहा है, पिता थान सिंह का सीना छलनी है। बेटी की डोली उठनी थी, लेकिन अब उसके शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया है। पुलिस ने आरोपी झोलाछाप को हिरासत में लिया है और FIR दर्ज कर ली है। लेकिन सवाल यही है, कब तक ऐसे झोलाछाप, मासूम जिंदगियों से खेलते रहेंगे? कब तक कोई दुल्हन मौत से ब्याह रचायेगी? शांति को शांति मिले और सिस्टम को चेतना।
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