Kohramlive : भारत और पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMOs) के बीच हुई अहम बैठक के बाद, दोनों देशों ने एलओसी पर तनाव कम करने और ‘एक भी गोली नहीं चलेगी’ का संकल्प लिया। लेकिन सवाल ये है, क्या वाकई अब गोलियां नहीं चलेंगी? क्या शांति की यह नई पटकथा सियासी इच्छाशक्ति से आगे बढ़ेगी या फिर पिछली स्क्रिप्ट की तरह अधूरी ही रह जायेगी? भारतीय सेना के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई और उनके पाकिस्तानी समकक्ष के बीच बातचीत में यह तय हुआ कि किसी भी तरह की आक्रामकता नहीं होगी। सीमा पर सैनिकों की उपस्थिति को घटाया जायेगा। विश्वास बहाली के उपायों को दोबारा शुरू किया जायेगा और फिर 12 मई को इस सहमति को और मजबूती दी गई।
लेकिन 13 तारीख को ही फिर आग?
सिर्फ 24 घंटे नहीं गुजरे थे कि पाकिस्तानी ड्रोन घुसपैठ और गोलीबारी की खबरें फिर सुर्खियां बन गईं। लेफ्टिनेंट जनरल घई की प्रतिक्रिया सीधी थी, “निराशाजनक… लेकिन अपेक्षित।” यह बयान अपने आप में गवाही देता है, भरोसे की डोर कितनी कमजोर है। 22 अप्रैल को हुये पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक। इसके बाद दोनों देशों के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण हो गये थे। भारत की तरफ से साफ संदेश है, “शांति की राह पाकिस्तान की नीयत से होकर गुजरती है।”
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