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बेनामी संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला… जानें क्या

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Kohramlive : मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने बेनामी संपत्ति को लेकर बड़ा फैसला दिया है। SC ने अब बेनामी संपत्ति मामले में 3 साल की सजा वाला कानून रद्द कर दिया हैं। बेनामी ट्रांजेक्शन एक्ट, 2016 की धारा 3(2)में यह प्रावधान था। कोर्ट ने कहा कि यह धारा स्पष्ट रूप से मनमानी है। बेनामी संपत्ति कानून-2016 में किया गया संशोधन उचित नहीं है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमणा, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हीमा कोहली की पीठ ने इस मामले पर फैसला सुनाया है। पीठ ने कहा कि 1988 के एक्ट के अनुसार ही 2016 में लाए गए अधिनियम के सेक्शन 3(2) को भी असंवैधानिक करार दिया गया है। क्योंकि यह संविधान के आर्टिकल 20(1) का उल्लंघन करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि 2016 के कानून के तहत सरकार को मिली संपत्ति जब्त करने का अधिकार पिछली तारीख से लागू नहीं हो सकता। यानी पुराने मामलों में 2016 के कानून के तहत कार्रवाई नहीं होगी।

क्या है यह बेनामी संपत्ति 

बेनामी संपत्ति वह प्रोपर्टी है, जिसकी कीमत किसी “और” ने चुकाई हो पर, नाम किसी दूसरे व्यक्ति के हो। यह संपत्त‍ि पत्नी, बच्चों या किसी रिश्तेदार के नाम पर भी खरीदी गई होती है। जिसके नाम पर यह संपत्त‍ि खरीदी गई होती है, उसे ‘बेनामदार’ कहते है।

कौन होता है बेनामदार 

हालांकि, जिसके नाम पर इस संपत्ति को लिया गया होता है वो केवल नाममात्र इसका मालिक होता है। जबकि असल हकदार वही होता है जिसने उस संपत्ति के लिए पैसे चुकाए होते हैं। ज्यादातर लोग अपना काला धन छुपाने के लिए ऐसा करते हैं।

इसलिए आई सजा रद्द करने की नौबत 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जो फैसला सुनाया उसका कनेक्शन कोलकाता हाइकोर्ट के फैसले से है। दरअसल, पहले गणपति डीलकॉम मामले की सुनवाई करते हुए कोलकाता हाईकोर्ट ने यही फैसला दिया था। इस फैसले पर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी फैसले को सही ठहराते हुए सजा को रद्द कर दिया। दरअसल, इस कानून से जुड़ा संशोधन 1 नवंबर, 2016 से लागू हुआ था, लेकिन बेनामी सम्पत्ति के मामले में 2016 से पहले फंसे लोगों पर भी इसी कानून के तहत कार्रवाई की जा रही थी।

अधिनियम कि धारा 3(2) बेनामी लेनदेन को अपराध घोषित करती है और इसे 3 साल तक के कारावास से दंडनीय बनाती है। दिसंबर 2019 में कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा था कि बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम 2016 का संशोधन पिछली तारीख से यानी रिट्रोस्पेकेट्व इफेक्ट से लागू नहीं किया जा सकता है।

बता दें  कि अधिनियम के इस संशोधन में, अधिनियम का नाम बदलने के अलावा, अन्य बातों के अलावा, बेनामी संपत्ति की कुर्की, जब्ती करने से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए थे। संशोधन में बेनामी संपत्ति लेनदेन से जुड़े अपराधों के लिए नए अधिनियम के तहत दंड का प्रावधान भी किया गया है।

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