Supreme court ने पूछा, लोन मोरेटोरियम में क्यों लग रहा समय

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नई दिल्ली :  Supreme court ने लोन मोरेटोरियम मामले में सरकार के रवैये पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि पहले ही दो करोड़ रुपए तक के लोन लेने वालों को फायदा देना का ऐलान किया है, फिर इसे अमल में क्यों नहीं लाया गया।  सरकार को फैसला लेने में एक महीने का वक्त नहीं लग सकता। कोर्ट ने मामले की सुनवाई अगले दो नवंबर तक के लिए टाल दी है।

चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने की बात थी

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि सरकार किसी सही फैसले के साथ ही कोर्ट में आएगी। सरकार लोगों का दर्द समझिए, अब लोगों की दिवाली आपके हाथ में है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ने कोर्ट को 2 करोड़ रुपए तक के लोन पर चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने की बात कही थी. लेकिन अब तक इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

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लोन मोरेटोरियम क्या होता है?

मोरेटोरियम का मतलब होता है आप अगर किसी चीज का भुगतान कर रहे हैं तो उसे एक निश्चित समय के लिए रोक दिया जाएगा। मान लीजिए अगर आपने कोई लोन लिया है तो उसकी ईएमआई को कुछ महीनों के लिए रोक सकते हैं। हां, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आपकी ईएमआई माफ कर दी गयी है।

कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन ने देश की अर्थव्यस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है। लॉकडाउन में लाखों नौकरियां गईं, लोगों की सैलरी में कटौती की गई। इसी को देखते हुए 22 मई को आरबीआई ने मॉनेटरी पॉलिसी के एलान के दौरान कहा था कि लोन मोरेटोरियम को तीन महीने के लिए बढ़ाया जा रहा है। इसका एलान पहले तीन महीने के लिए किया गया था।

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मोरेटोरियम के क्या फायदे हैं?

मोरेटोरियम में ईएमआई कुछ समय के लिए रोकी जा सकती है, लेकिन यहां पर एक बात ध्यान रखने वाली है कि आपकी ईएमआई पर लगने वाले ब्याज में कोई छूट नहीं होगी। मान लीजिए कि आप मोरेटोरियम के तहत तीन महीने बाद ईएमआई देते हैं तब भी आपको पिछले तीन महीने का ब्याज देना होगा।

सामान्य तौर पर अगर आप ईएमआई नहीं भर पाते तो उस पर ब्याज तो लगता है कि साथ ही क्रेडिट रेटिंग भी खराब हो जाती है लेकिन मोरेटोरियम के दौरान ईएमआई ना देने पर क्रेडिट रेटिंग पर कोई असर नहीं पड़ता। क्रेडिट रेटिंग नीचे नहीं जाएगी।

सबसे ज्यादा फायदा किसे?

लोन मोरेटोरियम का सबसे ज्यादा फायदा उद्योग धंधों के लिए है। लॉकडाउन के दौरान बिजनेस ना चलने से लोन भरना भी मुश्किल हो गया। इसलिए माना गया कि अगर ईएमआई भरने से राहत मिलेगी और उसके बाद अनलॉक में जैसे जैसे बिजनेस बढ़ेगा, तब कंपनियां अपना लोन चुका सकती हैं।

मामला Supreme court कैसे गया ?

मार्च से अगस्त तक मोरेटोरियम योजना यानी किश्त टालने के लिए मिली छूट का लाभ बड़ी संख्या में लोगों ने लिया था। उनकी शिकायत थी कि अब बैंक बकाया राशि पर अतिरिक्त ब्याज यानी ब्याज के ऊपर ब्याज लगा रहे हैं। यहीं से Supreme court पहुंचा यह मामला।

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