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सरकार बोली, ”बेटी अब तुम्हें कोई ले जा नहीं पायेगा”

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Ranchi : रांची की सुबह अपने ही सुरों में उलझी थी, लेकिन आज की हवाओं में एक अलग ही खुशबू थी—घर लौटते मासूम सपनों की खुशबू। वे नन्हीं आंखें जो न जाने कितनी रातों से अंधेरों में खोई थीं, वे नन्हे कदम जो बेगानों की गलियों में खो चुके थे, आज अपने घरों की ओर बढ़ रहे थे। दिल्ली की भीड़भाड़ भरी गलियों में, जहां जिंदगी दौड़ती तो थी, मगर ठहरती नहीं—वहीं से निकले थे झारखंड के ये 25 मासूम। कोई साहेबगंज की लाल मिट्टी का था, तो कोई गोड्डा की हरी-भरी वादियों से। किसी ने कभी मां की गोद में लोरी सुनी थी, तो कोई शायद अपनी मां को ही भूल चुका था। तस्करों की वो निर्दयी दुनिया, जहां बचपन बिकता है, वहां से इन्हें खींच लाया गया, सपनों के उन आंगनों में जहां इनकी हंसी कभी गूंजा करती थी।

मां की आंखों में इंतजार की नमी

खूंटी की संकरी गलियों में एक मां खड़ी थी, दरवाजे पर आंखें टिकाये, जिसकी आंखों में इंतजार की वो नमी थी, जो सालों से सूखने का नाम नहीं ले रही थी। तभी दूर से आती सरकारी गाड़ी के पहियों की धूल उसके दिल में हलचल मचा गई। अंदर दौड़ता एक भाई—”मां! दीदी आ गई!”—कहता हुआ बाहर भागा। और जब गाड़ी से वो उतरी, तो मां की आंखों से बरसात छूट पड़ी। एक दर्द, एक पीड़ा, और उसके खत्म होने की सिसकती आवाज़…

अब तुम्हें कोई ले जा नहीं पायेगा

झारखंड सरकार का यह प्रयास एक नई कहानी लिख रहा है, जहां मासूम बचपन सिर्फ किताबों में नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी महफूज़ रहेगा। CM हेमंत सोरेन की पहल रंग ला रही है, और महिला एवं बाल विकास विभाग की मेहनत आज इन 25 बच्चों को वो दुनिया लौटा रही है, जहां मां की ममता है, पिता का साया है, भाई-बहनों की खिलखिलाहट है।हर चेहरे पर उम्मीद के रंग थे। एकीकृत पुनर्वास केंद्र के नोडल ऑफिसर नचिकेता और उनकी टीम ने दिल्ली की गलियों में अंधेरे से जूझते इन बच्चों को खोज निकाला। उनके चेहरे पर संतोष की लकीर थी—”अब तुम्हें कोई ले जा नहीं पायेगा!”—यह शब्द उन बच्चों के कानों में किसी गीत की तरह बज रहे थे।

भविष्य की रोशनी

सरकार ने सिर्फ इन्हें बचाया ही नहीं, बल्कि इन्हें नई जिंदगी भी दे रही है। होम वेरिफिकेशन होगा, पुनर्वास योजनायें मिलेंगी, और इनकी निगरानी भी रखी जायेगी ताकि कोई इन्हें दोबारा अंधेरे में ना धकेल सके। महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार और निर्देशक किरण कुमारी पासी के निर्देश पर हर जिले के समाज कल्याण पदाधिकारी पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं।

उम्मीद अब भी जिंदा है

कई मासूम अभी भी खोये हुये हैं, कई मांएं अब भी दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठी हैं। उनके लिए सरकार ने 10582 नंबर जारी किया है, जहां कोई भी सूचना दे सकता है और किसी मासूम को बचाने की एक नई रोशनी जला सकता है। आज 25 बच्चे अपने घर लौट आये, मगर कहानी अभी खत्म नहीं हुई। हर उस मासूम के लिये, जो अब भी अंधेरे में है—ये सरकार का वादा है, ये समाज की जिम्मेदारी है कि कोई भी सपना तस्करों के हाथों बिकने ना पाये।

 

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