Giridih : गिरिडीह और पारसनाथ इलाके में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। भाकपा (माओवादी) की सक्रिय एरिया कमेटी सदस्य अनिता किस्कू उर्फ बबिता ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। बबिता ने गिरिडीह पुलिस केंद्र में पुलिस कप्तान डॉ. बिमल कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी अभिनव आनंद और ASP सुरजीत कुमार के समक्ष औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया। लगभग 29 साल की अनिता किस्कू मूल रूप से बोकारो जिले की रहने वाली है। वह पारसनाथ जोन, लुगु पहाड़ी, झुमरा पहाड़ी और कोल्हान क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय बताई जा रही थी। पुलिस के अनुसार, वह 25 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली एसएसी कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर की पत्नी है, जिसे गिरिडीह पुलिस ने हाल ही में गिरफ्तार किया था। पति की गिरफ्तारी के बाद बबिता का मनोबल टूट गया और उसने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।
2009 में संगठन से जुड़ी, जंगल में हुई थी शादी
पुलिस के सामने बबिता ने अपनी कहानी बताते हुये कहा कि वह वर्ष 2009 में माओवादी संगठन के संपर्क में आई थी। एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान उसका संपर्क नक्सलियों से हुआ था। वर्ष 2017 में उसने जंगल में ही शीर्ष कमांडर अजय महतो से शादी कर ली थी। संगठन में उसे लेवी वसूली और लोगों में डर पैदा करने जैसी जिम्मेदारियां दी गई थीं। बबिता ने पुलिस को बताया कि संगठन के भीतर शीर्ष कैडरों द्वारा किये जा रहे कथित आर्थिक और शारीरिक शोषण से वह परेशान हो चुकी थी। ग्रामीणों के साथ बेवजह मारपीट और हिंसा की घटनाओं ने भी उसके मन को झकझोर दिया था। धीरे-धीरे उसका भरोसा संगठन से उठता गया और पति की गिरफ्तारी के बाद उसने पूरी तरह हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया।पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाली बबिता के खिलाफ गिरिडीह, बोकारो और कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न थानों में कुल 15 संगीन मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, लूट, विस्फोटक अधिनियम, आर्म्स एक्ट, यूएपीए (UAPA) सहित अन्य गंभीर धाराएं शामिल हैं।
SP बोले, नक्सल संगठन को बड़ा झटका
गिरिडीह SP डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि 25 लाख के इनामी कमांडर की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसकी पत्नी का आत्मसमर्पण करना नक्सली संगठन के लिये बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि यह गिरिडीह, बोकारो, कोल्हान और सिंहभूम क्षेत्र में सक्रिय माओवादी गतिविधियों को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता है। SP ने अन्य भटके हुये नक्सलियों से भी अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की ‘नई दिशा-एक नई पहल’ आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और समाज की मुख्यधारा में वापस लौटें।
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