Ranchi : JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) की भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों के बीच मंगलवार की शाम बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC कार्यालय तथा परीक्षाओं का संचालन करने वाली एजेंसी मेसर्स TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। सरकार ने CID को पूरे मामले की जांच, प्राथमिकी दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं। कार्रवाई के दौरान जांच टीम ने JPSC के महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की और आयोग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा एजेंसी से जुड़े लोगों से पूछताछ की।
आधा दर्जन से अधिक लोग हिरासत में
सूत्रों के अनुसार, फिलहाल आधा दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां जुटाये गये दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं। संभावना जताई जा रही है कि देर रात या बुधवार तक इस मामले में FIR दर्ज होने के साथ कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
कंपनी का अधिकारी ही बनता रहा टॉपर
मामले की शिकायत में दावा किया गया है कि परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL का मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी कथित तौर पर जालसाजी के जरिये JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं में सफल होता रहा। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि वह कई बार शीर्ष रैंक हासिल करने वालों में शामिल रहा। इन्हीं शिकायतों के आधार पर मामले की जांच शुरू की गई है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि फिलहाल जांच के बाद ही हो सकेगी। शिकायत में टीडीपीएल, उसके मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी, निदेशक सत्यपाल सिंह, रामबीर सिंह तथा अन्य अज्ञात प्रोग्रामर और लोकसेवकों पर आपराधिक साजिश, अवैध वसूली, पेपर लीक, ओएमआर शीट में कथित हेरफेर, डिजिटल छेड़छाड़ और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगाये गये हैं। रांची के नगड़ी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता शिवशंकर शर्मा ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद जांच की प्रक्रिया तेज हुई।
JSSC ने किया था ब्लैकलिस्ट, फिर भी…
शिकायत के अनुसार, TDPL को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने 20 मई 2025 को कथित अनियमितताओं और काम के बदले मनमानी राशि मांगने के आरोपों के चलते ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद जून 2025 से कंपनी को JPSC की परीक्षाओं के संचालन का काम मिलता रहा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करती है। हालांकि इन आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आयेंगे।
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