मुम्बई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने सौतेली बेटी के साथ बलात्कार के आरोप से सौतेले पिता की सजा को बरकरार रखा है। आरोपी ने कोर्ट में राहत की गुहार लगाई थी। लेकिन दोषी पिता को कोई राहत नहीं दी गई। इस अपील पर न्यायमूर्ति संदीप के शिंदे की पीठ सुनवाई कर रही थी, जिसे स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने इस अपराध के लिए उसे दोषी ठहराया था और सजा सुनाई थी।
दरअसल, ये मामला ठाने का है। जहां 14 वर्षीय पीड़िता के पिता की मौत के बाद उसकी मां ने दूसरी शादी कर ली। पीड़िता अपनी मां, बहनों, सौतेले पिता (आरोपी) और सौतेले भाई के साथ ठाणे में रहने लगी। जब वह 7वीं कक्षा में पढ़ रही थी, तब उसके सौतेले पिता ने उसका यौन उत्पीड़न किया। जब भी उसकी मां काम करने के लिए बाहर जाती थी, वो दरिंदा उसे अपनी हवस का शिकार बनाता था।
कुछ वक्त बाद नाबालिग के गर्भवती होने पर ये अपराध सामने आया। डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि नाबालिग लड़की 4 महीने की गर्भवती थी। इसके बाद उसकी मां ने थाने जाकर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इसके बाद उसने अपनी बेटी का गर्भपात करा दिया। लेकिन फोरेंसिक स्टाफ ने डीएनए टेस्ट के लिए पीड़िता के ब्लड सैंपल लेने के साथ-साथ भ्रूण की कोशिकाओं के नमूने भी ले लिए थे।
केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने पीड़िता और उसकी मां का बयान दर्ज किया। इस दौरान पीड़ित लड़की ने दो अलग-अलग कहानियां पुलिस को बताईं। पीड़िता ने शुरू में आरोपी की पहचान छिपाने के लिए अपने स्तर पर पूरी कोशिश की, लेकिन आखिरकार, 26 अप्रैल 2014 को उसने खुलासा किया कि जब घर पर कोई नहीं था तो उसके सौतेले पिता ने उसके साथ बार-बार मारपीट और उसका यौन शोषण किया था। पुलिस ने तुरंत उसके सौतेले पिता को गिरफ्तार कर लिया गया।
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