Ranchi : झारखंड बिजली वितरण व्यवस्था को वर्षों से अपने कंधों पर संभाल रहे मानव दिवस कर्मियों और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने अब अपने हक और भविष्य की सुरक्षा के लिये आवाज बुलंद की है। विभिन्न मांगों को लेकर झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को प्रबंध निदेशक (CMD) से मिला और ज्ञापन सौंपा। केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने बहाली में प्राथमिकता, आयु सीमा में छूट, नियमितीकरण और समान काम के लिये समान वेतन जैसी महत्वपूर्ण मांगों को प्रमुखता से उठाया। संघ की सबसे प्रमुख मांग यह रही कि वर्ष 2016 और 2018 की नियुक्तियों की तर्ज पर आगामी बहाली में भी मानव दिवस कर्मियों को प्राथमिकता दी जाये। वहीं, नियुक्ति प्रक्रिया में आयु सीमा में विशेष छूट देने की मांग करते हुये कहा गया कि वर्तमान 5 वर्ष की छूट को बढ़ाकर 10 वर्ष किया जाये, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मियों को अवसर मिल सके।
26 साल में सिर्फ दो बार हुई तकनीकी नियुक्तियां
ज्ञापन में संघ ने बिजली निगम में रिक्त पड़े तकनीकी पदों का मुद्दा भी मजबूती से उठाया। संघ का कहना है कि राज्य गठन के बाद 26 वर्षों में केवल दो बार नियमित तकनीकी बहाली हुई है, जबकि हजारों स्वीकृत पद आज भी खाली हैं। कर्मचारियों ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था का पूरा ढांचा तकनीकी कर्मियों पर टिका है, इसलिये रिक्त पदों को जल्द भरना समय की मांग है। प्रतिनिधिमंडल ने वर्ष 2014 में विभाग और संघ के संयुक्त प्रयास से तैयार मानव दिवस कर्मियों की सूची को सेवा अवधि निर्धारण का आधार बनाने की मांग की। इसके अलावा 2014 के बाद कार्यरत कर्मचारियों को भी उनके वास्तविक कार्यकाल के आधार पर अनुभव और बहाली में प्राथमिकता देने की मांग रखी गई।
उमा देवी केस का हवाला, नियमितीकरण की मांग
संघ ने सर्वोच्च न्यायालय के चर्चित उमा देवी बनाम कर्नाटक सरकार मामले का उल्लेख करते हुये लगातार 10 वर्षों से सेवा दे रहे तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मियों को नियमित करने की मांग की। संघ का तर्क है कि देश के कई राज्यों में इस प्रकार के कर्मचारियों को नियमित सेवा का लाभ दिया गया है, इसलिये झारखंड में भी इसी दिशा में पहल होनी चाहिये। ज्ञापन में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि दैनिक वेतनभोगी और असंगठित कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के समान कार्य करते हैं, लेकिन उन्हें काफी कम वेतन मिलता है। संघ ने मांग की कि “समान काम के लिये समान वेतन” की नीति लागू कर कर्मचारियों को न्याय दिया जाये।
एजेंसी व्यवस्था खत्म करने की मांग
संघ ने वर्तमान एजेंसी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और वर्ष 2017 से पहले लागू प्रत्यक्ष व्यवस्था को पुनः बहाल करने की मांग की। वैकल्पिक रूप से पूरे राज्य में एक समान एजेंसी व्यवस्था लागू करने का सुझाव भी दिया गया, ताकि कर्मचारियों के बीच असमानता खत्म हो सके। ज्ञापन में कार्य के दौरान जान गंवाने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के आश्रितों के लिए स्पष्ट और मानवीय नियुक्ति नीति बनाने की मांग भी रखी गई। संघ का कहना है कि ऐसे परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिये। केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि झारखंड ऊर्जा विकास निगम और उसकी सहायक कंपनियों में कार्यरत मानव दिवस कर्मी एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी वर्षों से निगम की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन कर्मियों के हितों की रक्षा करना और उनके भविष्य को सुरक्षित करना विभाग की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है। प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद CMD श्रीनिवासन ने आश्वस्त किया कि ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर निगम सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जायेगा। इस अवसर पर अमित कुमार कश्यप, विजय सिंह, उदय मिश्रा, शिवनारायण साह, उत्पल दास, अभय कुमार सिंह, मुकेश यादव, मो. शमी, महाबीर महतो, मो. अकरम, आफताब अली जौहर, छोटू सिंह मुंडा, मुकेश साहू, रमेश महतो, विद्यासागर, अनिकेत सिंह सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।
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