Ranchi : झारखंड की मिट्टी से उठी एक पुकार, गांव की चौपालों से लेकर राजधानी के गलियारों तक गूंजने लगी है, ‘पेसा सिर्फ कानून नहीं, पहचान है।’ झारखंड की राजधानी रांची आज ऐतिहासिक गवाह बनी। पेसा नियमावली पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में जुटे बुद्धिजीवी, जनप्रतिनिधि और नीति-निर्माता। कार्यशाला में मंत्री रामदास सोरेन, मंत्री दीपक बिरुवा, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे एवं पूर्व अपर सचिव एवं राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के वरिष्ठ सदस्य के. राजू मौजूद थे। रामदास सोरेन बोले, “यह सुझाव नहीं, गांव की आत्मा की आवाज है… पेसा को और मजबूत बनायेंगे।” दीपक बिरुवा ने कहा, “समूह की समझ से कानून को आकार मिलेगा।” शिल्पी नेहा तिर्की ने भावुक होते हुये कहा, “सामूहिकता ही हमारी असली ताकत है।” दीपिका पांडेय सिंह ने वादा किया, “ये नियमावली सिर्फ झारखंड नहीं, पूरे देश के लिये उदाहरण बनेगी।” के राजू ने कहा, “जहां जन की बात सुनी जाती है, वहीं असली पेसा जिंदा रहता है। नियम बनाने से पहले आखिरी घर तक की बात सुनें।” कार्यशाला में ड्राफ्ट पेश हुआ, बहस भी हुई, लेकिन मक़सद एक ही ‘गांव का आदमी खुद तय करे उसका विकास कैसा हो।’ खूंटी जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने ड्राफ्ट पेसा नियमावली 2024 पर प्रस्तुति दी, जिसमें झारखंड की परंपरा, संस्कृति और ग्राम सभा की आत्मा झलकती है। पूरे कार्यशाला का एक ही संदेश सामने आया कि “पेसा अब सिर्फ कागज पर नहीं रहेगा, गांव की हकीकत बनेगा।”
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