Kohramlive : फिरोजपुर बॉर्डर के गेट नंबर 208/1 पर तैनात जवान फसल कटाई के समय भारतीय किसानों की सुरक्षा में ड्यूटी पर था। तपती दोपहरी में एक पेड़ की छांव उसे थोड़ा आराम देने को पुकार रही थी और वही छांव उसके लिये साया बन गई पाकिस्तानी रेंजर्स की गिरफ्त का। न तो उसने दीवार फांदी, न बंदूक चलाई। सिर्फ एक कदम अनजाने में अटारी-वाघा बॉर्डर पार चला गया। फिर पाकिस्तानी सैनिकों ने उसे घेर लिया, सर्विस राइफल भी जब्त कर ली गई। और यहीं से शुरू हुई 21 दिन की लंबी कैद। सीमा सुरक्षा बल और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच शांति से पूर्णम साव को भारत को सौंपा गया। एक बार फिर वर्दी में, लेकिन आंखों में कहानियां थीं, वो जो सिर्फ सरहदें समझती हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अगर ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी न होती, तो पाकिस्तान इतनी जल्दी नहीं झुकता। भारत के सख्त रुख के आगे, पाकिस्तान की चालें ढीली पड़ गईं। इससे पहले कई बार भारत ने फ्लैग मीटिंग मांगी, लेकिन पाकिस्तान चुप रहा। पत्नी रजनी पति के लौट जाने से बेहद खुश है। वो अपनी पति के सही-सलामत वापसी के लिये BSF अफसरों से लेकर बंगाल की CM तक से मिली थी।
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