Saraikela : सरायकेला-खरसावां की पथरीली जमीन पर बरसों से नशे की काली छाया पड़ती रही है। खेतों में कभी लहलहाती फसलें नहीं, बल्कि अफीम की हरियाली पलती रही। यह हरियाली भले ही आंखों को भाती थी, पर उसके पीछे छिपा जहर कितने ही परिवारों को तबाह कर गया। लेकिन इस बार तस्वीर बदल रही है। पुलिस कप्तान के नेतृत्व में दलभंगा ओपी परिसर में स्थानीय मानकी मुंडा और जनप्रतिनिधि जुटे, पुलिस ने साफ कहा, “अब इस धरती पर जहर नहीं, जीवन उगेगा।” वहीं, गांव के लोगों ने भी एक स्वर में शपथ ली “हम अफीम नहीं, अन्न बोएंगे… हम नशा नहीं, जीवन बोएंगे।”
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने स्थानीय बोली में जब ग्रामीणों को अफीम के दुष्प्रभाव समझाये गये, तो कई आंखें नम हो गईं। नशे के शिकार परिवारों की कहानियां सबके दिल को चीर गईं। मगर उसी पल, वैकल्पिक खेती की नई राह सुझाते हुये उन्होंने ग्रामीणों को आत्मनिर्भर भविष्य का सपना भी दिखाया गया। सरायकेला-खरसावां की मिट्टी ने मानो यह वादा किया कि अब यहां धान की खुशबू होगी, सब्जियों की हरियाली होगी, बच्चों की हंसी होगी, न कि अफीम की कड़वी छाया।
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