कोहराम लाइव डेस्क : जीवन में कई प्रकार के भ्रम का शिकार आदमी हो जाता है। इससे कई प्रकार की अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इनसे बचने की कोशिश करनी चाहिए। महिलाओं में फॉल्स अथवा फैंटम प्रेग्नेंसी एक ऐसा भ्रम है, जिसमें महिला को बिना गर्भवती हुए यह महसूस होता है कि वह प्रेग्नेंट है। यह एक असामान्य स्थिति है। इसे मेडिकल भाषा में स्यूडोसाइसिस कहते हैं। इसके लक्षण, कारण और बचाव से रूबरू होना जरूरी है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह बहुत जरूरी है।
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अनियमित मासिक धर्म और सिर दर्द
फॉल्स प्रेग्नेंसी के दौरान पीड़ित महिला में भी प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षण जैसे- थकान,अनियमित मासिक धर्म, सिरदर्द,महिलाओं के स्तन के साइज में बदलाव, उल्टी आना और पेट में गैस बनना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस स्थिति में न सिर्फ पीड़ित महिला, बल्कि दूसरे लोग भी उसे गर्भवती समझने की भूल कर बैठते हैं, जबकि असल में महिला के गर्भ में कोई बच्चा नहीं होता है।
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मानसिक दबाव से उत्पन्न होती है ऐसी स्थिति
फाल्स प्रेग्नेंसी का सबसे मुख्य कारण मानसिक दबाव होता है। यह समस्या उन महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है, जिनमें मां बनने की बहुत तीव्र इच्छा होती है या जिन महिलाओं का किसी कारण बार-बार गर्भपात हो रहा हो। ऐसी महिलाओं के भीतर प्रेग्नेंसी जैसे लक्षण पैदा होने लगते हैं। जो बाद में फॉल्स प्रेग्नेंसी का कारण बन जाते हैं।
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इलाज के लिए दवा लेने की जरूरत नहीं
फॉल्स प्रेग्नेंसी का इलाज करने के लिए डॉक्टरों से दवा लेने की जरूरत नहीं होती है। इस रोग में मनोरोग विशेषज्ञ की मदद से पीड़ित महिला को सिर्फ समझाया जाता है कि वह गर्भवती नहीं है। उसमें सिर्फ गर्भवती के लक्षण नजर आ रहे हैं। फाल्स प्रेग्नेंसी से बचने के लिए महिलाओं को स्त्री रोग विशेषज्ञ के संपर्क में रहना चाहिए। डॉक्टर आपकी यूरिन, खून की जांच और अल्ट्रासाउंड से पता लगाएंगे कि आप सच में प्रेग्नेंट है या नहीं।










