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झारखंड में कांग्रेस की सीट ले उड़े परिमल नथवानी…

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Ranchi : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिये हुये चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम ने दमदार जीत दर्ज कर राज्यसभा का टिकट भुनाया, वहीं, दूसरी तरफ NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेरते हुये तीसरी बार राज्यसभा का टिकट हासिल कर लिया। सबसे ज्यादा चर्चा अब इस बात की है कि आखिर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को वे वोट क्यों नहीं मिले, जिनका दावा महागठबंधन लगातार कर रहा था।

81 वोट पड़े, लेकिन नतीजों ने खोल दी सियासी परतें

झारखंड विधानसभा के सभी 81 विधायकों ने मतदान किया। मतगणना पूरी हुई तो तस्वीर काफी दिलचस्प नजर आई। झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम को सबसे अधिक 31 वैध वोट मिले और उनकी जीत लगभग एकतरफा रही। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी को 30 वोट मिले थे, लेकिन इनमें से दो मत रद्द हो गये। इसके बावजूद 28 वैध वोटों के साथ वे जीतने में सफल रहे। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट मिले, लेकिन उनमें से एक वोट अमान्य घोषित होने के बाद उनका आंकड़ा 19 पर सिमट गया। कुल तीन वोट रद्द होने से चुनावी गणित और भी दिलचस्प बन गया।चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन के नेता लगातार दावा कर रहे थे कि दोनों सीटें महागठबंधन के खाते में जायेंगी। झामुमो और कांग्रेस नेताओं का कहना था कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और क्रॉस वोटिंग की कोई संभावना नहीं है। लेकिन परिणाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर वे वोट कहां चले गये, जिन पर कांग्रेस भरोसा कर रही थी? परिमल नथवानी की जीत ने साफ संकेत दे दिया है कि सत्ता पक्ष के भीतर सब कुछ उतना सहज नहीं है, जितना सार्वजनिक मंचों से बताया जा रहा था।

कौन हैं परिमल नथवानी, जिन्होंने तीसरी बार मारी बाजी?

परिमल नथवानी कोई नया नाम नहीं हैं। देश के बड़े औद्योगिक समूह रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े नथवानी लंबे समय से झारखंड की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं।उन्होंने वर्ष 2008 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा का चुनाव जीता था। इसके बाद 2014 में भी उन्होंने जीत दोहराई। अब तीसरी बार राज्यसभा पहुंचकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि झारखंड की राजनीति में उनकी पकड़ आज भी मजबूत बनी हुई है।

शिक्षक से मंत्री और अब राज्यसभा सांसद बने बैजनाथ राम

इस चुनाव का दूसरा बड़ा चेहरा रहे बैजनाथ राम की कहानी भी किसी राजनीतिक संघर्ष गाथा से कम नहीं है। लातेहार जिले के परसही गांव में जन्मे बैजनाथ राम ने साधारण परिवार से निकलकर राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। बहुत कम लोग जानते हैं कि राजनीति में आने से पहले उन्होंने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शिक्षक के रूप में भी काम किया था।झारखंड राज्य गठन के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हो गये। बैजनाथ राम ने वर्ष 2000 में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर पहली बार लातेहार विधानसभा सीट जीती थी। इसके बाद वे खेल मंत्री, मद्य निषेध मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। बाद में भाजपा में शामिल होकर शिक्षा मंत्री बने। लेकिन समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और उन्होंने झामुमो का दामन थाम लिया। अब राज्यसभा पहुंचकर उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।

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