कोहराम लाइव डेस्क : पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के हाल के दो दिवसीय श्रीलंका विजिट से इंडिया की टेंशन बढ़ गई है। इसका मुख्य कारण यह है कि इमरान ने श्रीलंका से चीन की अति महत्वाकांक्षी परियोजना ‘बेल्ट ऐंड रोड’ में शामिल होने की अपील की है। श्रीलंका में चीन अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। इससे भारत पहले से ही चिंतित है। चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) में रेलवे, पावर प्लांट्स और हिंद महासागर में ग्वादर बंदरगाह शामिल है। उल्लेखनीय है कि भारत चीन की इस योजना का शुरू से विरोध करता रहा है। ऐसी स्थिति में इमरान श्रीलंका को की गई इमरान की नई पेशकश से इंडिया का सिरदर्द बढ़ना स्वाभाविक है। भारत के पूर्व राजदूत राजीव भाटिया ने इसे इमरान खान के दौरे की सबसे परेशान करने पहलू करार दिया है।
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भारत की सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं
भारत के रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि कोलंबो को ग्वादर बंदरगाह के इस्तेमाल करने की पेशकश भारत की सुरक्षा के लिहाज से भी ठीक नहीं है। एक रिसर्च डेटा के मुताबिक, श्रीलंका के बंदरगाहों का 70 फीसदी सामान भारत के जरिये ही होकर जाता है। साल 2014 में श्रीलंका ने कोलंबो बंदरगाह पर एक चीनी पनडुब्बी और युद्धपोत को ठहरने की इजाजत दे दी थी जिसे लेकर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
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श्रीलंका ने हंबनटोटा बंदरगाह चीनी कंपनी को सौंपा
साल 2017 में कर्ज ना चुका पाने की स्थिति में श्रीलंका ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम हंबनटोटा बंदरगाह चीनी कंपनी को 99 सालों के लिए लीज पर सौंप दिया था। श्रीलंका ने कोलंबो बंदरगाह पर कोलंबो इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल विकसित करने के लिए भी चीन को अनुमति दी थी। इन सबको लेकर भारत की नाराजगी दूर करने के लिए श्रीलंका की सरकार ने कोलंबो बंदरगाह के ईस्ट टर्मिनल को नई दिल्ली और टोक्यो के साथ विकसित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
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भारत ने जताई आपत्ति
पिछले महीने ही श्रीलंका ने राष्ट्रीय संपत्तियों में विदेशी निवेश को लेकर हो रहे विरोध का हवाला देते हुए भारत और जापान को दोनों देशों को इससे बाहर कर दिया। भारत ने श्रीलंका के फैसले को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि उसे उम्मीद थी कि वह समझौते का सम्मान करेगा। इसके बाद, श्रीलंका ने इसके विकल्प के तौर पर भारत को एक दूसरे टर्मिनल के विकास का प्रस्ताव दिया। ये टर्मिनल भी कोलंबो एयरपोर्ट का ही हिस्सा है और चीन के टर्मिनल के बिल्कुल करीब है।








