- PM ने कहा- सैकड़ों साथी लौटकर घर नहीं आए, हेल्थवर्कर्स को टीका लगाकर कर्ज उतार रहे
कोहराम लाइव डेस्क : देश में कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन की शुरुआत करने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भावुक हो गए। कोरोना पीरिएड के संकट भरे वक्त को याद कर उनकी आंखें नम हो गईं। गला भर आया। भावुक होकर कहा, जो हमें छोड़कर चले गए, उन्हें वैसी विदाई भी नहीं मिल सकी, जिसके वे हकदार थे। मन उदास हो जाता है, लेकिन साथियों संकट के उस वातावरण में निराशा के वातावरण में कोई आशा का भी संचार कर रहा था। हमें बचाने के लिए आप प्राणों को संकट में डाल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिस, आशा वर्कर्स, सफाई कर्मचारी ने अपने दायित्व को निभाया। सैकड़ों साथी लौटकर घर नहीं आए।
उन्होंने एक-एक जीवन को बचाने के लिए अपना जीवन आहूत कर दिया। इसलिए कोरोना का पहला टीका स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों को लगाकर एक तरह से समाज अपना ऋण चुका रहा है।
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जिसे हमारी कमजोरी समझते थे, वहीं ताकत बनी
पीएम ने कहा कि साथियों मानव इतिहास में कई आपदाएं आईं, युद्ध हुए, लेकिन कोरोना ऐसी महामारी थी, जिसका अनुभव न तो साइंस को था न सोसायटी को था। जो खबरें आ रही थीं वह पूरी दुनिया के साथ-साथ हर भारतीय को विचलित कर रही थी। ऐसे हालात में दुनिया के बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स भारत को लेकर तमाम आशंकाएं जता रहे था। भारत की बहुत बड़ी आबादी को कमजोरी बताया जा रहा था, लेकिन हमने उसे अपनी ताकत बना लिया।
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हमने देश का आत्मविश्वास बनाए रखा
मोदी ने कहा कि हमने ताली-थाली बजाकर और दिया जलाकर देश के आत्मविश्वास को बनाए रखा। कोरोना को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका यही था कि जो जहां था वहीं रहे। लेकिन देश की इतनी बड़ी आबादी को बंद रखना आसान नहीं था। इसका अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, यह भी हमारी चिंता थी, लेकिन हमने व्यक्ति की जिंदगी को प्राथमिकता दी।
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