Kohramlive : आज के डिजिटल दौर में कई लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या केवल मोबाइल नंबर डालकर किसी व्यक्ति की लाइव लोकेशन पता की जा सकती है। इंटरनेट पर ऐसी कई वेबसाइट और ऐप मौजूद हैं जो एक क्लिक में लोकेशन बताने का दावा करते हैं, लेकिन ज्यादातर दावे फर्जी होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल मोबाइल नंबर किसी व्यक्ति की लाइव लोकेशन बताने के लिये पर्याप्त नहीं होता। फोन की लोकेशन GPS, मोबाइल टावर, Wi-Fi और डिवाइस की अनुमति जैसी तकनीकों से तय होती है। इन जानकारियों तक सामान्य यूजर की पहुंच नहीं होती। कई फर्जी वेबसाइटें लोकेशन दिखाने के नाम पर लोगों से मोबाइल नंबर, ईमेल, OTP या पैसे की मांग करती हैं। ऐसी साइटों पर निजी जानकारी साझा करना साइबर ठगी का कारण बन सकता है।
Google Maps और Apple Find My जैसे आधिकारिक फीचर भी तभी काम करते हैं, जब संबंधित व्यक्ति अपनी सहमति से लोकेशन शेयर करे। बिना अनुमति किसी की लाइव लोकेशन देखना संभव नहीं है। पुलिस और जांच एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया के तहत टेलीकॉम कंपनियों से मिली जानकारी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और टावर डेटा की मदद से लोकेशन का पता लगाती हैं। यह सुविधा आम लोगों के लिये उपलब्ध नहीं होती। अगर मोबाइल चोरी हो जाये तो केवल नंबर से लोकेशन ट्रैक नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों में सरकार के CEIR पोर्टल के जरिए IMEI नंबर की मदद से फोन को ब्लॉक और ट्रैक करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। साइबर विशेषज्ञों की सलाह है कि मोबाइल नंबर से लाइव लोकेशन बताने का दावा करने वाली वेबसाइटों से सावधान रहें और किसी भी स्थिति में OTP, बैंक डिटेल या अन्य निजी जानकारी साझा न करें।
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