spot_img
Tuesday, September 27, 2022
spot_img
Tuesday, September 27, 2022
spot_img

Related articles

spot_img

चीन की तरह भारत में होगा खिलौना हब

spot_img
- Advertisement -

लक्ष्य यह है कि 2025 तक खिलौना उद्योग में 20 हजार करोड़ का निवेश और तीन लाख लोगों को रोजगार मिले  : राज्य सरकार 

नई दिल्ली : चीन से खिलौनों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए राज्य सरकार ने खिलौना नीति-2020 तैयार कराया है। चीन की तरह प्रदेश को खिलौना निर्माण का हब बनाने का खाका इस नीति में खींचा गया है। औद्योगिक संगठनों व विभागों से इस प्रस्तावित नीति पर सुझाव मांगे गए हैं। सरकार जल्द से जल्द इस नीति को लागू करने की तैयारी में है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक खिलौना उद्योग में 20 हजार करोड़ का निवेश और तीन लाख लोगों को रोजगार देने की है।

उत्तर प्रदेश बना देश का पहला खिलौना उद्योग राज्य

- Advertisement -

इस नीति के लागू होने पर उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन जाएगा जहां पर खिलौना उद्योग के लिए अलग से नीति होगी। नीति में खिलौना उद्योग में निवेश करने वाले उद्यमियों को तमाम सुविधाएं देने की व्यवस्था है। यहां तक कि एमएसएमई विभाग इकाईयों द्वारा बनाए जाने वाले खिलौनों की डिजाइनिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग के साथ ही निर्यात में सहयोग करेगा। विश्वस्तरीय मेलों और प्रदर्शियों में यूपी के खिलौनों को प्रदर्शित किया जाएगा। नई नीति को विश्वस्तरीय मानकों पर कसा गया है। ट्वाय कलस्टर अथवा पार्क की स्थापना के लिए सरकार विश्वस्तरीय इको सिस्टम, डिजाइन, टेस्टिंग आदि सुविधाएं उद्यमियों को मुहैया कराएगी। स्किल डेवलेपमेंट का काम भी किया जाएगा। उद्योगों की स्थापना के लिए बाधारहित सिंगल विंडो सिस्टम दिया जाएगा। एमएसएमई की प्रस्तावित योजनाओं में ट्वाय कलस्टर शामिल सूक्ष्म, लघु एवं मद्यम उद्यम विभाग राज्य में तेजी से उद्योगों की स्थापना और अधिक से अधिक रोजगार देने के तहत कई योजनाओं पर काम कर रहा है। जिसके तहत इलेक्ट्रानिंग मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर, इंडस्ट्रियल जोन, आप्टिकल फाइवर कनेक्टिविटी के साथ ही ट्वाय मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर प्रमुख हैं। खिलौना उद्योग में बड़ी तादाद में अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल श्रमिकों को रोजगार की संभावनाएं देखी जा रही हैं, खासकर महिला कामगारों के लिए। ग्लोबल मार्केट रिसर्च फर्म (इमार्क) के आंकड़ें बताते हैं कि भारत में 90 फीसदी खिलौनों का आयात चीन से होता है। खिलौनों के विश्व बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज आधी फीसदी है। देश में इस समय करीब दस हजार करोड़ रुपये का खिलौने का बाजार है। राज्य में झांसी में परंपरागत खिलौने बनते हैं। चित्रकूट और वाराणसी में लकड़ी के खिलौने का काम होता है। इसेक्ट्रानिक और बैटरी आधारित खिलौने का निर्माण नहीं के बराबर राज्य में है। खिलौना नीति में राज्य में इलेक्ट्रानिक खिलौने, सिलिकान के खिलौने के साथ ही परंपरागत खिलौनों को नया लुक देने पर जोर है।

इसे भी पढ़े :368 नई जंतु प्रजातियां खोजी गयी, जिनमे से 116 प्रजाति पहली बार नज़र आयी|

इसे भी पढ़े :दूसरे बैंक अकाउंट में भेज दिया है पैसा तो न करें चिंता, वापस पा…

- Advertisement -
spot_img
spot_img
spot_img

Published On :

spot_img
spot_img

Recent articles

spot_img

Don't Miss

spot_img