UP : भरी जवानी में घर छोड़ कर चला गया जाहिद अली बुढ़ापे में घर लौटा। उसने ठान रखा था कि वो कभी दोबारा घर नहीं लौटेगा, पर घरवालों की जिद के आगे वह झुक गया। जब कुछ लोग उसे घेर बीते लम्हों के बारे में पूछना चाहा तो वे बमक गये। उनका कहना था कि पुराने दिनों को याद नहीं करना चाहते, मुकद्दर में यहीं लिखा था उम्र के आखिरी पड़ाव में घर लौट आये हैं। वहीं उसने ठान लिया था कि वह कभी घर नहीं लौटेगा। उसके नसीब में तेवरखास गांव की मिट्टी नहीं है। उसने यह सोचकर निकाह तक नहीं किया कि घरवाली या होनेवाले औलाद यह भी जिद कर सकती है कि अपने घर लौट चलो, इसीलिए मन में यह तय कर लिया था कि शादी नहीं करनी है। करीब 18 साल की उम्र में घर छोड़ चले जाने वाले जाहिद 52 साल की उम्र में घर लौटे। उनके घर लौटने की कहानी भी बहुत रोचक है। जाहिद के घर लौटने की खबर भी मीडिया में वायरल हो रही है। वहीं उनके घर लौट आने पर मोहल्ले में ईद जैसी खुशियां छाई है। हर कोई उन्हें घेर ऊपर से नीचे तक निहार रहा है। बीते लम्हों को हर कोई जानने को बेताब है।
लगातार दो साल तक परीक्षा में फेल हो जाने पर जाहिद को उसकी मां हसरत जहां ने खूब डांटा। यह डांट उसे चुभ गई। मां ने उसे सुधारने की गरज से डांटा था, पर जाहिद ने दिल में ठान लिया कि घर छोड़ देना है। उसने मां से 5 रुपये मांगे। उस रोज घर से निकला तो फिर लौटा नहीं। वर्ष 1970 में जाहिद घर छोड़कर चला गया। जीवन का लंबा सफर जहां-तहां बीता। जिंदगी में कई धूप-छांव देखें, पर अपने इरादे से कभी डिगे नहीं। जो ठान रखा था, उसी राह पर निकल पड़े। कुछ दिन पहले की बात है, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के नजदीक जाहिद अली पर एक समाजसेवी यूट्यूबर मुशाहिद खान की नजर पड़ी। ना जाने कैसे मुशाहिद खान उनके चेहरा और लहजा को पढ़ गये। उन्हें लगा कि जाहिद ने अपने सीने में गहरा जख्म छुपा रखा है। हौले-हौले उन्हें कुरेदना शुरू किया। जाहिद सबकुछ उगलते चले गये। मुशाहिद ने जब यह जाना कि गुस्से में 52 साल पहले घर छोड़ जाहिद सड़क पर है। रिक्शा चला अपना गुजारा कर रहे हैं। खुली आसमां के नीचे रिक्शे पर ही उनका बिस्तर सजता है, तब मुशाहिद ने उन्हें उनके अपनों से मिलाने को ठान लिया। जाहिद का सारा दुख विभिन्न ग्रुपों में डाल दिया। जाहिद अली के घरवाले भी यह सबकुछ जाने और निकल पड़े जाहिद की खोज में। गुरुवार यानी आज जाहिद को खोजते-फिरते घरवाले पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के नजदीक नेशनल क्लब के पास पहुंचे। जाहिद उन्हें मिल गये और उन्हें पहचान भी लिया। रूठे जाहिद को खूब मनाया और फिर उन्हें घर लेकर लौट आये। उनका घर मुरादाबाद की बिलारी कोतवाली के तेवरखास गांव में है। जाहिद अली को 52 साल का सफर कई जगहों पर ले गया। शुरू में नेपाल को अपना ठिकाना बनाया, फिर बनवसा आ गये। इसके बाद कभी गुजरात तो कभी बंगाल में समय गुजारे। रात में रिक्शे पर दो पटरे रख सो जाया करते थे। अपना अशियाना तक नहीं बनाया। जब कभी उन्हें पर्व-त्योहार में घर की याद सताती थी तो उन्हें अपना संक्ल्प याद आ जाता था कि कभी घर नहीं लौटना है।
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