Ranchi(Kuldeep Tiwari) : रांची से सटे ओरमांझी प्रखंड के बड़ा उलातु गांव की सुबह इस बार रोज जैसी नहीं थी। खेत-खलिहान की राह छोड़कर गांव के लोग अपने इतिहास, अपनी धरोहर और अपनी जीवनरेखा के किनारे जुटे थे। सामने था गांव का वह ऐतिहासिक तालाब, जिसके पानी में पीढ़ियों की यादें उतरती रही हैं। और आज उसी तालाब को बचाने की जिद में पूरा गांव एक साथ खड़ा था। उस वक्त ओरमांझी अंचल से CI, अमीन, कर्मचारी और पुलिस बल तालाब की जमीन की नापी के लिये पहुंचे थे, वहीं, तालाब के लिये जमीन दान करने वाले परिवारों के परिजन भी मौके पर मौजूद थे। शांत ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। ग्रामीणों ने साफ कहा कि “हमारे पूर्वजों ने यह जमीन किसी व्यक्ति के लिये नहीं, पूरे गांव के लिये दान की थी। यहां लोग नहाते हैं, पूजा-पाठ होता है, मवेशियों की प्यास बुझती है और हर सुख-दुख में यही तालाब गांव के साथ खड़ा रहता है। इसे वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता। तालाब की जमीन, तालाब की ही रहेगी।” ग्रामीणों के विरोध के बाद अंचल की टीम बिना नापी किये वापस लौट गई। तालाब किनारे मौजूद ग्रामीणों का गुस्सा भी साफ दिखाई दिया। उनका कहना था कि अगर भविष्य में कोई जमीन दलाल इस सार्वजनिक तालाब पर कब्जे या भराई की कोशिश करेगा तो गांव चुप नहीं बैठेगा। ग्रामीणों ने दो टूक कहा, “जरूरत पड़ी तो जान दे देंगे, लेकिन गांव की इस धरोहर को मिटने नहीं देंगे।” तालाब की जमीन से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने के आश्वासन के साथ जमीन दान करने वाले परिवारों ने ग्रामसभा की प्रति पर हस्ताक्षर किये। इसके बाद ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी छलक आई और इसे ग्रामीणों ने बड़ी जीत बताया। सुने क्या बोले, गांववाले…
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