- जामताड़ा के शातिर साइबर ठगों पर शोध करेगी अमेरिकी एजेंसी
कोहराम लाइव डेस्क : साइबर ठगों का गढ़ है Jamtara. देशभर में साइबर ठगी के लिए है बदनाम। देश में ज्यादातर साइबर फ्रॉड के मामले झारखंड के इसी जिले से जुड़े हुए होते हैं। यहां के साइबर ठगों की कारगुजारी के चर्चे अमेरिका तक भी पहुंच चुकी है। इसी गैरकानूनी धंधे और इससे जुड़े लोगों पर एक अमेरिकी एजेंसी अब शोध करने जा रही है।
छोटे से बड़े सभी हो चुके हैं ठगी के शिकार
जामताड़ा के कई नाबालिग भी अच्छे-खासे पढ़े लिखे लोगों को अपने ठगी का शिकार बना लेते हैं और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगती। छोटे से लेकर कई राजनेताओं तक को ये साइबर अपना शिकार बना चुके हैं।
अमेरिकी एजेंसी इसका शोध करेगी कि इस इलाके के बेहद कम पढ़-लिखे युवक भी कैसे लोगों को ठगी का शिकार बना लेते हैं। ये भी पता किया जाएगा कि इन्हें तकनीक और कंप्यूटर की इतनी गहन जानकारी कैसे मिलती है, जिससे ये किसी का भी अकाउंट हैक कर लेते हैं।
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Jamtara के ठगों ने लगाया करोड़ों का चूना
अमेरिकी एजेंसी जामताड़ा पहुंच कर वहां के कम पढ़े-लिखे युवकों का ब्रेन मैपिंग कर यह जानने का प्रयास करेगी कि आखिर किस तरीके से बेहद न्यूनतम स्तर की पढ़ाई से यहां के ठगों ने आईटी में महारत हासिल कर ली है। अमेरिकी एजेंसी के लोगों ने दिल्ली में डीजीपी स्तर के अधिकारी के साथ बैठक भी की है।
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जामताड़ा के करमातर पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड से पता चलता है कि अप्रैल 2015 से मार्च 2017 के बीच 12 अलग-अलग राज्यों की पुलिस टीमों ने 23 बार इस जिले का दौरा किया है और अलग-अलग मामलों में लगभग 38 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जामताड़ा जिला पुलिस द्वारा जुलाई 2014 से जुलाई 2017 के बीच क्षेत्र के 330 निवासियों के खिलाफ 80 से अधिक साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए है। अकेले करमातर पुलिस स्टेशन में, 2017 में ठगी के मामलों में 100 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई थीं।












