Ranchi : डिजिटल इंडिया, स्मार्ट पुलिसिंग, हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था, ये शब्द सुनने में जितने चमकदार लगते हैं, रांची के तुपुदाना ओपी की हकीकत उतनी ही हैरान करने वाली है। राजधानी रांची से सटे और खूंटी सीमा पर स्थित तुपुदाना ओपी पिछले दो वर्षों से बिना किसी आधिकारिक सरकारी मोबाइल नंबर के चल रहा है। यानी आम जनता के पास पुलिस तक सीधे पहुंचने का कोई सार्वजनिक माध्यम ही नहीं है।
ED की रेड में जब्त हो गया सरकारी नंबर
इस अजीब कहानी की शुरुआत साल 2023 में हुई। तुपुदाना ओपी की तत्कालीन थाना प्रभारी मीरा सिंह पर बालू और जमीन के अवैध कारोबार में संलिप्तता के आरोप लगे थे। मामला जब ED (प्रवर्तन निदेशालय) तक पहुंचा, तो एजेंसी ने उनके आवास पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान ED ने तुपुदाना ओपी का सरकारी मोबाइल नंबर 94317 06167 समेत कुल आठ मोबाइल फोन जब्त कर लिये। लेकिन हैरानी की बात यह है कि दो साल बीत जाने के बाद भी थाने को नया सरकारी नंबर उपलब्ध नहीं कराया गया। स्थिति और भी गंभीर इसलिये हो गयी, क्योंकि साल 2020 में बकाया बिल भुगतान नहीं होने के कारण थाने का लैंडलाइन फोन भी डिस्कनेक्ट कर दिया गया था। ऐसे में तुपुदाना ओपी पूरी तरह संपर्क विहीन हो गया। इन दो वर्षों में तीन थानेदार आये और गये।
घटना होने पर ‘चहेतों’ को ढूंढती है जनता
पूर्व में उग्रवाद प्रभावित रहा तुपुदाना इलाका भौगोलिक रूप से काफी संवेदनशील माना जाता है। यहां किसी भी दुर्घटना, अपराध या आपात स्थिति में आम लोगों के पास पुलिस से संपर्क का कोई सीधा माध्यम नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि थाने के कुछ पुलिसकर्मियों ने अपने खास लोगों और मददगारों को निजी मोबाइल नंबर दे रखे हैं। ऐसे में यदि कोई घटना होती है, तो लोगों को पहले उन ‘चहेतों’ को ढूंढना पड़ता है, फिर उनके जरिये सूचना पुलिस तक पहुंचती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था किसी सरकारी सिस्टम से ज्यादा निजी नेटवर्क जैसी हो गयी है। सरकारी नंबर नहीं होने की वजह से ओपी में तैनात एक पुलिसकर्मी के हाथ पूरे थाने का ‘रिमोट कंट्रोल सिस्टम’ पर चल रहा है।
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