Kohramlive : दुनिया भर में बढ़ती गर्मी को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी का क्लाइमेट बैलेंस अब पहले जैसा नहीं रहा और आने वाले सालों में इसका असर और गंभीर हो सकता है। हाल ही में जारी State of the Global Climate 2025 में भी तापमान में तेज बढ़ोतरी और उसके खतरनाक परिणामों को लेकर चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट(Report) के मुताबिक 2026 में वैश्विक तापमान नया रिकॉर्ड बना सकता है और यह साल इतिहास के सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो सकता है।

World Meteorological Organization (WMO) की रिपोर्ट(Report) के अनुसार 2015 से 2025 तक के 11 साल अब तक के सबसे गर्म साल रहे। 2024 इतिहास का सबसे गर्म साल दर्ज किया गया। 2025 का औसत वैश्विक तापमान प्री-इंडस्ट्रियल स्तर (1850-1900) से लगभग 1.43°C–1.44°C ज्यादा रहा। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की मात्रा पिछले 20 लाख सालों में सबसे ज्यादा पहुंच गई। रिपोर्ट(Report) के अनुसार मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों का स्तर भी पिछले 8 लाख सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है।
वैज्ञानिकों के अनुसार Greenhouse Effect की वजह से पृथ्वी पर गर्मी बढ़ रही है। CO₂, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसें सूरज की गर्मी को वायुमंडल में फंसा लेती हैं। इससे धरती की सतह से निकलने वाली ऊर्जा अंतरिक्ष में वापस नहीं जा पाती। नतीजा यह होता है कि पृथ्वी का एनर्जी बैलेंस बिगड़ जाता है और तापमान बढ़ने लगता है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।Global Glacier Monitoring Service के अनुसार 2024–2025 के दौरान 155 ग्लेशियरों के अध्ययन में पाया गया कि बर्फ बनने की तुलना में पिघलने की दर काफी ज्यादा रही।
ग्रीनलैंड में हर साल करीब 260–266 अरब टन बर्फ पिघल रही है। अंटार्कटिका में लगभग 135 अरब टन बर्फ हर साल कम हो रही है। इससे समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले 41 वर्षों में समुद्र का pH स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे पानी अधिक अम्लीय हो रहा है। इसका असर समुद्री जीवों और पूरी समुद्री पारिस्थितिकी पर पड़ रहा है। समुद्र हर साल इंसानों द्वारा छोड़ी गई करीब 29% CO₂ को सोख लेता है, लेकिन अब इसकी क्षमता कम होती जा रही है।
रिपोर्ट(Report) के मुताबिक भारत पर भी दिख रहा गर्मी का असर
रिपोर्ट(Report) में भारत समेत कई देशों में मौसम के तेजी से बदलते पैटर्न का जिक्र किया गया है। कई क्षेत्रों में अचानक भारी बारिश और बाढ़ देखने को मिली। कुछ इलाकों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो रही है।हिंद महासागर के पानी का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि El Niño के प्रभाव के कारण 2026 में गर्मी और बढ़ सकती है। अनुमान है कि 2026 का औसत तापमान प्री-इंडस्ट्रियल स्तर से 1.44°C या उससे ज्यादा हो सकता है।
यह साल अब तक के चार सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) का बढ़ता इस्तेमाल, जंगलों की कटाई, कृषि से निकलने वाली मीथेन गैस, समुद्री बर्फ और हिमावरण का कम होना, एरोसोल उत्सर्जन में कमी। इन सब कारणों से पृथ्वी ज्यादा सौर ऊर्जा सोख रही है और बाहर कम छोड़ पा रही है।
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