Ranchi(Akhilesh Kumar) : रांची से सटे नामकुम की बेटी पूनम मिश्रा वियतनाम जाने से पहले जैसा बोली, वैसा कर दिखाई। उसके दावे में वाकई दमखम था। वियतनाम की धरती पर आयोजित वर्ल्ड रॉ पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में पूनम ने दमखम का ऐसा प्रदर्शन किया कि दुनिया ने झारखंड की ताकत को सलाम किया। 72 किलोग्राम भार वर्ग में पूनम मिश्रा ने कुल 380 किलोग्राम वजन उठाकर दो गोल्ड मेडल अपने नाम किये, वहीं, उन्हें ‘वर्ल्ड्स स्ट्रॉन्गेस्ट वुमेन’ के प्रतिष्ठित खिताब से भी नवाजा गया। इस वर्ग में चीन की खिलाड़ी दूसरे और श्रीलंका की खिलाड़ी तीसरे स्थान पर रहीं। प्रतियोगिता में 10 देशों की 25 महिला पावरलिफ्टरों ने हिस्सा लिया था। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहले ही करीब 12 गोल्ड मेडल जीत चुकी पूनम का यह अंतरराष्ट्रीय कारनामा खास है। एक गृहिणी से वर्ल्ड चैंपियन बनने तक का उनका सफर आज लाखों महिलाओं के लिये प्रेरणा बन गया है। उनकी जीत की खबर मिलते ही रांची से लेकर पूरे झारखंड में खेलप्रेमियों और पावरलिफ्टिंग से जुड़े खिलाड़ियों में जश्न का माहौल है। अपनी जीत के बाद पूनम मिश्रा ने भावुक होते हुये Kohramlive.com से कहा कि वर्ल्ड चैंपियन बनने के लिए दिन-रात मेहनत की। आंखों के सामने सिर्फ लक्ष्य था। ईमानदार मेहनत और आत्मविश्वास ने मुझे यहां तक पहुंचाया। उन्होंने महिलाओं को संदेश देते हुये कहा कि उम्र या पारिवारिक जिम्मेदारियां कभी भी सपनों के रास्ते में दीवार नहीं बन सकतीं। आप सिर्फ गृहिणी नहीं, चैंपियन भी बन सकती हैं। खुद को घर की चारदीवारी तक सीमित न करें, अपने सपनों को मरने न दें, उन्हें पंख दें।






