कोहराम लाइव डेस्क : अगर नई सोच के साथ आगे बढ़ा जाए, तो कामयाबी को अलग पहचान दिलाने वाली कामयाबी को अपना मुकाम मिल ही जाता है। बेशक आज के समय में स्टार्टअप की दुनिया में कई युवाओं ने नाम कमाने के साथ लोगों के कामकाज को आसान बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है। इनमें युवा उद्यमी हर्षिल माथुर कामयाबी की नई मिसाल बनाते दिख रहे हैं। उन्होंने पेमेंट प्रोसेस को सरल बनाया। आईआईटी रुड़की से बीटेक डिग्री हासिल किए हुए युवा एंटरप्रिन्योर हर्षिल माथुर ने अपने साथी शशांक के साथ मिलकर स्टार्टअप और लघु उद्योगों के लिए भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए साल 2014 में पेमेंट गेटवे ‘रेजरपे’ की शुरुआत की।
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बनाई थी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेक्शन लैब
प्रारंभ से ही हर्षिल खुद का कुछ नया काम करना चाहते थ। आईआईटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपने संस्थान में प्रोग्रामिंग और सॉफ्टवेयर प्रोजक्ट को प्रमोट करने के मकसद से एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेक्शन लैब बनाई थी। वर्ष 2013 में आईआईटी से डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी शुरू की, पर सिर्फ एक साल में ही नौकरी से इस्तीफा देकर अपने काम में लग गए और 2014 में रेजरपे की नींव रखी।
प्रारंभ में फेस की परेशानियां
शुरुआत में हर्षिल और उनके पार्टनर शशांक को रेजरपे के लिए क्लाइंट ढूंढ़ने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जयपुर में एक स्कूल-फीस मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में इसकी शुरुआत हुई थी। दुर्भाग्य से उस समय इस प्रोडक्ट को खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं था।
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80 में एक मिला मददगार
हर्षिल बताते हैं कि डिजिटल पेमेंट गेटवे का आइडिया आने के बाद वे लोग करीब 80 बैंकरों के पास गए, तब जाकर उन्हें एक ऐसा व्यक्ति मिला, जो उनकी मदद के लिए तैयार हुआ। तमाम परेशानी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने प्रोडक्ट के प्रचार-प्रसार में लगे रहे। आज के समय में रेजरपे काफी तेजी से काम कर रहा है। ओयो, जोमैटो, स्विगी, एयरटेल, आईआरसीटीसी जैसी कंपनियों के साथ-साथ 3,50,000 से अधिक व्यापारियों को यह अपनी सर्विस देता है।
12 फीसदी से अधिक पर कमांड
हर्षिल की कंपनी फिलहाल देश के पेमेंट डोमेन के 12 प्रतिशत से अधिक पर कमांड रखती है। इस साल रेजरपे के पेमेंट गेटवे से पांच अरब डॉलर का लेन-देन हो चुका है।
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