Kohramlive : बच्चों की सेहत को लेकर एक गांव ने ऐसा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा अब दूर-दूर तक होने लगी है। गांव वालों ने मिलकर तय किया कि अब यहां आइसक्रीम की गाड़ियां नहीं आयेंगी। यह मामला गुडुरु गांव का है, जो Chintoor मंडल में पड़ता है। यहां ग्रामीणों ने गांव में आइसक्रीम के ठेले और गाड़ियों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी है। वहीं, साफ चेतावनी दी गई है कि अगर कोई इस नियम को तोड़ता है तो उस पर ₹5000 का जुर्माना लगाया जायेगा। ग्रामीणों ने लोगों को जानकारी देने के लिये गांव के प्रवेश मार्ग पर एक बैनर भी लगाया है। इसमें साफ लिखा है कि गुडुरु गांव में आइसक्रीम की गाड़ियों का आना प्रतिबंधित है और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगेगा। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब एक हफ्ते पहले गांव के बुजुर्गों ने बैठक कर यह फैसला लिया। उनका कहना है कि कुछ वेंडर बिना साफ-सफाई और सुरक्षा मानकों का पालन किये आइसक्रीम बनाकर गांव में बेच रहे थे। ग्रामीण मादिवी राजू का कहना है कि आइसक्रीम से सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होते हैं। कई बच्चों ने इसे खाने के बाद दांत और पेट दर्द की शिकायत की थी। वहीं गांव के एक अन्य निवासी बदिशा वेंकटेश के अनुसार, आइसक्रीम में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और संभावित हानिकारक केमिकल्स को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई थी। गुडुरु गांव में सामूहिक फैसलों की यह पहली मिसाल नहीं है। इससे पहले भी ग्रामीणों ने मिलकर इलाके में चल रहे एक गैर-कानूनी शराब के अड्डे को बंद कराया था। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह फैसला किसी खास वेंडर के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि वे व्यापार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बच्चों की सेहत के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। गांव के इस फैसले की आसपास के इलाकों में खूब चर्चा हो रही है। कुछ लोग इसे बच्चों की सुरक्षा के लिये उठाया गया साहसी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि पूरी तरह बैन के बजाय सख्त नियम बनाना बेहतर विकल्प हो सकता था।
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