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बेकार न जाने दें बच्चों का समर वेकेशन, इन 3 स्मार्ट गेम्स से बनाये होशियार…

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Kohramlive : गर्मी की छुट्टियां आते ही बच्चों के चेहरे पर जो मुस्कान खिलती है, वो किसी त्योहार से कम नहीं होती। ना स्कूल की टेंशन, ना होमवर्क का दबाव, बस मस्ती ही मस्ती! लेकिन यही वक्त है जब खेल-खेल में बच्चों का भविष्य भी संवारा जा सकता है। समर वेकेशन में बच्चों को फ्री टाइम और आजादी मिलता है। इस टाइम नई चीजें सीखने का बेहतरीन मौका है। दिमाग और शरीर दोनों के विकास का सही समय है। अगर सही दिशा-दशा मिले तो यही छुट्टियां बच्चों को और स्मार्ट बना सकती हैं।

शतरंज: दिमाग का असली खेल

बच्चों को रणनीति बनाना सिखाता है। इससे क्रिटिकल थिंकिंग, डिसीजन मेकिंग एवं फोकस और धैर्य बढ़ती है। आगे चलकर टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकता है, वहीं, करियर का भी रास्ता खुल सकता है। शतरंज खेल के एक-एक चाल से दिमाग कमाल होता जाता है।

पजल: खेल-खेल में ब्रेन एक्सरसाइज

पजल खेल में कई टुकड़ों को जोड़कर पूरी तस्वीर बनती है। इससे ऑब्जर्वेशन स्किल, पेशेंस, प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी बढ़ती है। रोज 1-2 घंटे का पजल खेल से दिमाग और तेज बनता है।

सुडोकू: नंबर का जादू

1 से 9 तक के नंबर को सही जगह भरना होता है। इससे बच्चे लॉजिकल थिंकिंग, कंसंट्रेशन, पैटर्न पहचानना सीखते हैं। यह ऐसा खेल है जो ध्यान केंद्रित (कंसंट्रेशन) को बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है। इसमें 1 से 9 तक के अंकों को एक ग्रिड में इस तरह भरना होता है कि कोई भी नंबर एक ही पंक्ति, कॉलम या बॉक्स में दोबारा न जाये। यह बच्चों को पैटर्न पहचानने और दिमाग को व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करने की आदत डालने में मदद करता है।

माता-पिता के लिये संदेश

बच्चों को सिर्फ मोबाइल तक सीमित न रखें। उक्त ब्रेन गेम्स में शामिल करें। मस्ती के साथ-साथ सीखने का माहौल बनायें।

 

 

 

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