- ग्रामीणों ने डीसी से की पानी, बिजली व अन्य सुविधाओं की मांग
कोहराम लाइव डेस्क: लातेहार के चंदवा प्रखंड की बरवाटोली पंचायत के जावाखाड़ और बेलटाड़ जैसे आदिवासी टोले सामान्य सुविधाओं से भी वंचित हैं। यहां अब तक मूलभूत विकास भी नहीं पहुंचा है। प्रखंड कार्यालय से ये लगभग सात किलोमीटर देर हैं। इन टोलों में कायदे का पहुंच पथ भी नहीं है। गांव में पानी, बिजली, सड़क व अन्य सरकारी सुविधाएं मुहैया कराने की मांग ग्रामीणों ने लातेहार छीसी से की है।
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कच्ची सड़क तक नहीं
आजादी के इतने वर्षों के बाद भी तमाम आश्वासनों के बावजूद जावाखाड़ और बेलटांड़ में पहुंचने के लिए कच्ची सड़क तक नहीं है। सरकारी कर्मी, पदाधिकारी व जनप्रतिनिधियों के कदम इस गांव में नहीं पड़ते हैं।
9 आदिवासी परिवारों का टोला
बहामनी आइंद, नेएन बागे, सुनीता आइंद, जार्ज आइंद, उमवलन सुरीन, रेजन बागे, जोसेफ आइंद, दनियल मुंडा, बेलन सुरीन, ज्योति सुरीन, मिस्तार आइंद, नईमी आइंद, जवंती मुंडा ने कहा कि जिन्हें उन्होंने दस साल अपने पंचायत प्रतिनिधि के रूप में चुना था, उन्हें भी इस टोले से कोई मतलब नहीं रहता है। इस टोले में रहने वाले सभी 9 परिवारों में आदिवासी समुदाय के लोग निवास करते हैं, यह टोला पूरी तरह पिछड़ा हुआ है।
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दूषित पानी पीने की मजबूरी
गांव के लोग पानी के लिए एक कुआं पर निर्भर हैं। उसमें भी दूषित पानी है, जिसे ग्रामीण पीते हैं। जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन की उपेक्षा से लोग परेशान हैं। ग्रामीणों को पंचायत मुख्यालय अथवा प्रखंड मुख्यालय एवं बाजार हाट जाने के लिए पुल विहीन नदी पार करनी पड़ती है।
बरसात में आने–जाने में परेशानी
पुल नहीं होने से बरसात में आवागमन के लिए लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। जनप्रतिनिधी सिर्फ वोट के समय नजर आते हैं। बाकी समय ढूंढने पर भी नहीं मिलते।
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