Kohramlive : पूर्व प्रधानमंत्री आई के गुजराल के पुत्र और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल साइबर ठगी का शिकार हो गये। साइबर क्रिमिनलों ने मैसेजिंग ऐप पर उनकी प्रोफाइल फोटो लगाकर फर्जी अकाउंट बनाया और उनकी कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) को करोड़ों रुपये ट्रांसफर करने के निर्देश दे दिये। इस साइबर फ्रॉड में कंपनी को कुल 7.8 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
चार दिनों में चार RTGS से उड़ाये करोड़ों
पुलिस के हवाले से मीडिया में आई खबर के अनुसार, यह धोखाधड़ी 12 जून से 16 जून 2026 के बीच हुई। जालसाजों ने नरेश गुजराल की डिस्प्ले फोटो का इस्तेमाल कर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर फर्जी पहचान बनाई और कंपनी के CFO को तत्काल व्यावसायिक जरूरत बताकर रकम भेजने को कहा। निर्देशों को सही मानते हुये अधिकारी ने चार दिनों के भीतर चार अलग-अलग RTGS ट्रांजेक्शन कर दिये।
बेटी की नजर पड़ी तो खुला फर्जीवाड़ा
इस पूरे मामले का खुलासा 16 जून को हुआ, जब नरेश गुजराल की बेटी की नजर संदिग्ध लेनदेन पर पड़ी। उन्होंने अपने पिता से संपर्क कर ट्रांजेक्शन की पुष्टि करनी चाही। जांच में पता चला कि गुजराल ने ऐसा कोई निर्देश दिया ही नहीं था। इसके बाद तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
7.8 करोड़ में से 4.28 करोड़ रुपये फ्रीज
शिकायत मिलते ही साइबर अपराध शाखा एक्टिव हो गई। पुलिस ने विभिन्न बैंकों में ट्रांसफर की गई रकम का पता लगाते हुये 7.68 करोड़ रुपये में से 4.28 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिये हैं। अधिकारियों का कहना है कि त्वरित शिकायत दर्ज होने की वजह से बड़ी रकम बचाने में सफलता मिली। जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम पहले महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के चार अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई थी। प्रत्येक खाते में 1 से 2 करोड़ रुपये के बीच राशि ट्रांसफर की गई। इसके बाद रकम को 30 से 40 अन्य खातों में बांट दिया गया और फिर कई ‘म्यूल अकाउंट्स’ के जरिये आगे ट्रांसफर किया गया, ताकि पैसों का ट्रैक छिपाया जा सके। साइबर जांच एजेंसियां अब पैसों की पूरी आवाजाही का विश्लेषण कर रही हैं और उन खाताधारकों की पहचान में जुटी हैं, जिन तक यह रकम पहुंची। पुलिस का कहना है कि शेष राशि की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिये लगातार कार्रवाई की जा रही है।
नरेश गुजराल बोले, समय पर शिकायत से बची बड़ी रकम
नरेश गुजराल ने मीडिया से कहा कि उनकी कंपनी और CFO साइबर क्रिमिनलों के झांसे में आ गये थे। उस समय वह शहर से बाहर थे। उन्होंने बताया कि साइबर क्राइम विभाग को तत्काल सूचना देने के कारण चोरी की गई रकम का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सुरक्षित किया जा सका। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी वित्तीय निर्देश की पुष्टि किये बिना बड़े लेनदेन न करें।
बढ़ रहे हैं ‘डीपी क्लोन’ साइबर फ्रॉड
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में साइबर क्रिमिनल सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर किसी व्यक्ति की फोटो और पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में किसी भी वित्तीय निर्देश पर अमल करने से पहले फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
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