कोहराम लाइव डेस्क : सामान्य रूप से सांस लेने की मुख्य प्रक्रिया नाक से शुरू होकर फेफड़ों तक जाती है। कई बार सर्दी-जुकाम की समस्या या अन्य कारणों से नाक बंद होने पर हम सभी मुंह से सांस लेते हैं। यदि किसी को मुंह से सांस लेने की आदत पड़ जाए, तो ये स्थिति नुकसानदायक हो सकती है, खासकर बच्चों के लिए। हालांकि मुंह से सांस लेना बच्चों और बड़ों के लिए क्यों खतरे पैदा करता है। आइए, जानते हैं मुंह से सांस लेने की आदत के खतरे।
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मुंह के सूखेपन की समस्या
अगर आपका बच्चा नाक की अपेक्षा मुंह से ज्यादा सांस लेता है, तो उसे मुंह के सूखेपन (ड्राई माउथ) की समस्या हो सकती है। जब बच्चे मुंह से सांस लेते हैं, तो हवा उनके पूरे मुंह से गुजरती है और अपने साथ मॉइश्चर (नमी) को भी ले जाती है। मुंह को बैक्टीरिया से बचाने के लिए आपके मुंह में सलाइवा (थूक) की पर्याप्त मात्रा बेहद जरूरी है। सलाइवा की कमी के कारण मुंह की कई समस्याएं जैसे- कैविटीज, दांतों का इंफेक्शन, सांसों की बदबू आदि हो सकती हैं।
मुंह और दांतों का आकार बिगड़ने का खतरा
मुंह से सांस लेने के कारण बच्चों के चेहरे और दांतों का शेप भी बिगड़ सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब बच्चा लंबे समय तक मुंह से सांस लेता है, तो उसके रूप में ये परिवर्तन हो सकते हैं- चेहरा पतला और लंबा हो सकता है, दांत आड़े-टेढ़े हो सकते हैं, मुस्कुराते या हंसते समय मसूड़े दिखाई देने की समस्या आदि।
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हो सकते हैं हार्ट के रोग
मुंह से सांस लेना आपके बच्चे को कई खतरनाक बीमारियों का भी शिकार बना सकता है। रिसर्च बताती हैं कि मुंह से सांस लेने के दौरान सही मात्रा में ऑक्सीजन शरीर के अंदर नहीं पहुंच पाती है, जिसके कारण धमनियों में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। ऑक्सीजन की कमी उसे हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का शिकार बना सकती है। बच्चे को अनिद्रा की समस्या भी संभव है।
कम नींद से कमजोर होगा दिमाग
आमतौर पर जो लोग मुंह से सांस लेते हैं, उन्हें अच्छी नींद नहीं आती है, जिसके कारण उनका शरीर सोने के बाद भी थका हुआ रहता है। यही कारण है कि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मुंह से सांस लेने वाले बच्चों में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी कुछ हद तक प्रभावित होता है। कम नींद लेने से दिमाग कमजोर होता है और कई तरह की शारीरिक समस्याएं और खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं।
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