Chauparan(Krishna Paswan) : चौपारण(Chauparan ) के चयकला गांव की रात में हर सांस में इबादत थी और हर धड़कन में मोहब्बत। हजरत दुलाह शाह बाबा का दरबार सूफियाना सुरों से इस कदर महक उठा कि जैसे खुद फिजा भी झूम उठी हो। तीन दिवसीय उर्स के दूसरे दिन सजी कव्वाली की महफिल में सुरों में एकता की तस्वीर उकेरते नजर आये। मशहूर कव्वाल इश्तेयाक भारती और शाह मुराद चिश्ती आमने-सामने थे। एक से बढ़कर एक कलाम, एक से बढ़कर एक अंदाज, महफिल पूरी रात तालियों से गूंजती रही।
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“वाह-वाह” की गूंज से गूंजा Chauparan
शाह मुराद चिश्ती की पेशकश ने ऐसा जादू बिखेरा कि श्रोता देर रात तक झूमते रहे। हर कलाम पर “वाह-वाह” की गूंज और हर सुर में रूहानी सुकून। करीब एक सदी से चली आ रही इस उर्स की परंपरा आज भी उसी शान और अकीदत के साथ जिंदा है। झारखंड ही नहीं, दूर-दराज के राज्यों से भी लोग यहां जियारत के लिये पहुंचते हैं। दरगाह में चादरपोशी कर लोगों ने अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली की दुआ मांगी। नातख्वानों ने भी अपने कलाम से महफिल को और यादगार बना दिया।
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