Kohramlive : इस साल 22 अप्रैल को पहलगाम की पहाड़ियों पर जब बंदूकें गरजीं, तो हर भारतीय की रगों में लहू कुछ तेज दौड़ने लगा। ये छोटा हमला नहीं था, सीमा पार से भेजा गया सीधा संदेश था “हम अब भी जिंदा हैं।” लेकिन उन्हें ये नहीं पता था, भारत जवाब देता है और वो भी सिंदूरी अंगारों से। 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत हुई। आसमानी शेरों ने उड़ान भरी, चुपचाप, सटीक और घातक। आतंकी ठिकानों पर बरसी आग, रडार जले, कमांड सेंटर ध्वस्त हुये और पाकिस्तान की हेकड़ी बर्फ सी पिघल गई। फिर आया झूठ का तूफान, 8 मई को जब पाकिस्तानी जनरल्स की नींद टूटी, तो बयानों की मशीन चालू हुई, “हमने भारत के छह विमान गिरा दिये।” लेकिन उधर से जनरल चौहान की आवाज गूंजी, “हमारे कुछ विमान जरूर गिरे, लेकिन हमारी रणनीति नहीं डगमगाई। हमने सीखा, सुधारा और दूसरे ही दिन दुश्मन को सबक सिखाया।” जनरल चौहान ने मीडिया से कहा कि “पाकिस्तान का दावा झूठ का गुब्बारा है, जिसे हमने सटीक सर्जिकल स्ट्राइक से फोड़ दिया। विमान क्यों गिरे, ये जानना मेरे लिए ज्यादा जरूरी है, क्योंकि हार नहीं सबक ही सेना की सबसे बड़ी पूंजी होती है।” जिन विमानों ने उड़ान भरी, वो सिर्फ स्टील और टेक्नोलॉजी नहीं थे, बल्कि शौर्य, नीति और प्रतिशोध का मेल थे। फिर नई ताकत से उड़ा, और दुश्मन की सांसें उड़ा दीं।
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