UP : गर्मी की उस तपती दोपहर में, जब कस्बे की गलियों में सिर्फ धूप बिछी थी, निधौली चौराहे की एक दुकान से सौंदर्य का सामान लेकर लौट रही एक ब्यूटी पार्लर संचालिका के जीवन में स्याही का वो अध्याय खुला, जिसकी कल्पना भी रूह कंपा दे। उसकी गलती बस इतनी थी कि उसका पति उसे छोड़कर किसी और शहर में, किसी और के साथ था। और वो, अपनी इज्जत और गुजारे के लिए खुद मेहनत कर रही थी, एक अजनबी से कभी-कभी आर्थिक मदद लेकर। लेकिन समाज ने ये मंजूर न किया और भाई भानू यादव, जो खून का रिश्ता था, वही नफरत की नालियों में बह गया। बीते 21 मई की दोपहर, जब महिला रोज की तरह चौराहे से सामान लेकर लौट रही थी, तभी वहां दिखे लाठी, डंडे और बंदूक से लैस तीन हैवान भानू यादव, चित्रांश और हरिनंदन। गाड़ी में जबरन घसीटकर अपने घर लाये, दरवाजा बंद हुआ और फिर शुरू हुआ, शरीर को नोंच डालने वाला नंगा तांडव। बाल काटे गये, भौंहें उड़ाई गईं, आंगन में निर्वस्त्र कर पीटा गया। इसके बाद कहानी उस बिंदु पर पहुंची, जहां इंसानियत दम तोड़ देती है। आगरा के दयालबाग जहां महिला को 24 मई तक जंजीरों में बांध कर, नौ नरपिशाचों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। हर रात एक नया जख्म, हर सुबह एक नया डर और 25 मई की रात, किसी तरह वह निकली। टूटी-फूटी, सहमी और भयभीत, लेकिन जिंदा। दयालबाग पुलिस चौकी तक पहुंची, लेकिन वहां मिला सिर्फ 300 रुपये और घर लौटने का सुझाव। न इंसाफ, न सुरक्षा, बस खामोश सहानुभूति। अब मामला पुलिस के पास है। सीओ जलेसर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं, “गहन जांच हो रही है। कार्रवाई होगी।”
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