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ममता को सबसे बड़ा झटका: TMC के 19 सांसद बागी गुट में शामिल!

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West Bengal : पश्चिम बंगाल में कभी अभेद्य माने जाने वाले TMC (तृणमूल कांग्रेस) के किले में अब दरारों की चर्चा खुलेआम होने लगी है। सत्ता के गलियारों से लेकर चाय की दुकानों तक एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या ममता बनर्जी की पार्टी किसी बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ रही है? पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब कथित तौर पर बड़े विद्रोह का रूप लेती दिखाई दे रही है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद एक अलग गुट के साथ खड़े होने की तैयारी में हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पार्टी की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

जब बड़े नामों की चर्चा शुरू हुई, बढ़ गई बेचैनी

राजनीतिक हलकों में हलचल तब और बढ़ गई, जब विद्रोही खेमे में शामिल होने की चर्चाओं के बीच कई चर्चित चेहरों के नाम सामने आने लगे। इनमें आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, जादवपुर से सांसद सायोनी घोष, बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान सहित कई अन्य सांसदों के नाम चर्चा में हैं। यदि ये अटकलें सच साबित होती हैं, तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिये अब तक का सबसे बड़ा आंतरिक राजनीतिक झटका माना जायेगा।

इन सांसदों के नाम चर्चा में

सूत्रों के हवाले से जिन सांसदों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल), काकोली घोष दस्तीदार (बारासात), जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार), खलीलुर रहमान (जंगीपुर), यूसुफ पठान (बहरामपुर), अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद), पार्थ भौमिक (बैरकपुर), बापी हलदार (मथुरापुर), सायोनी घोष (जादवपुर), माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)
मिताली बाग (आरामबाग), दीपक अधिकारी उर्फ देव (घाटाल), कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम), जून मालिया (मेदिनीपुर), अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा), शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व)
असित कुमार माल (बोलपुर), शताब्दी रॉय (बीरभूम), रचना बनर्जी (हुगली) शामिल हैं।

22 सांसदों तक पहुंच सकता है आंकड़ा!

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, यदि सायोनी घोष और माला रॉय भी कथित विद्रोही गुट के साथ औपचारिक रूप से खड़ी होती हैं, तो लोकसभा में इस खेमे की संख्या 22 तक पहुंच सकती है। बताया जा रहा है कि यह समूह काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एक अलग पहचान बनाने की दिशा में विचार कर रहा है। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है।

सुष्मिता देव के इस्तीफे ने बढ़ाई अटकलें

इसी बीच राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव के इस्तीफे ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। उन्होंने पार्टी और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देते हुये अपने निर्णय को व्यक्तिगत और राजनीतिक कारणों से प्रेरित बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे घटनाक्रमों ने पार्टी के भीतर चल रही असहमति की चर्चाओं को और बल दिया है।

विधानसभा में भी बढ़ रही बेचैनी

लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा को लेकर भी दावे किये जा रहे हैं। विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि विद्रोही विधायकों की संख्या 64 तक पहुंच चुकी है और यह संख्या आगे भी बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका समूह खुद को “असली तृणमूल” मानता है और कांग्रेस में विलय जैसी किसी संभावना से साफ इनकार करता है।

शताब्दी रॉय का बयान बना चर्चा का विषय

संकट के बीच वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय का बयान भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि यदि एक-दो सांसद पार्टी छोड़ते तो उसे व्यक्तिगत निर्णय माना जा सकता था, लेकिन बड़ी संख्या में नेताओं की नाराजगी नेतृत्व के लिये गंभीर संकेत है। उन्होंने संगठन में निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व शैली को लेकर भी सवाल उठाये।

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