New Delhi : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में झटके के बाद अब TMC (तृणमूल कांग्रेस) के संसदीय दल में भी बड़ी टूट की चर्चाओं ने सियासी गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। सोमवार को उस समय राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई, जब TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि पार्टी के करीब 20 सांसदों ने भाजपा नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देने का फैसला किया है। दिलचस्प बात यह है कि यह दावा ऐसे वक्त सामने आया है, जब TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी दिल्ली में INDIA गठबंधन की अहम बैठक में विपक्षी एकजुटता का संदेश देने में जुटी थीं।
‘लोकसभा स्पीकर को भेजा गया पत्र’
काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि सांसदों के एक समूह ने अपनी राजनीतिक स्थिति से लोकसभा अध्यक्ष को भी अवगत करा दिया है। उनका कहना है कि यह फैसला आपसी विचार-विमर्श और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुये लिया गया है। दस्तीदार ने कहा कि वे अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक हैं और कई सांसदों ने उनके साथ मिलकर आगे की रणनीति तैयार की है। लोकसभा में TMC के वर्तमान में 28 सांसद हैं। यदि 20 सांसदों के समर्थन का दावा सही साबित होता है, तो यह पार्टी नेतृत्व के लिये बड़ा राजनीतिक झटका माना जायेगा।
भाजपा में शामिल नहीं होंगे, लेकिन देंगे समर्थन
सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि असंतुष्ट सांसदों ने फिलहाल न तो TMC छोड़ने का फैसला किया है और न ही भाजपा में शामिल होने का। सूत्रों के मुताबिक, ये सांसद अलग संसदीय समूह के रूप में काम करते हुये NDA को समर्थन देने की रणनीति पर आगे बढ़ सकते हैं। राजनीतिक जानकार इसे दल-बदल कानून की जटिलताओं से बचने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं।
‘40 साल ममता के साथ रही, लेकिन…’
काकोली घोष ने अपने बयान में भावुक अंदाज भी दिखाया। उन्होंने कहा कि वह चार दशक से ममता बनर्जी के साथ जुड़ी रही हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हालात बदल गये। उनके अनुसार, कुछ नेताओं के बढ़ते प्रभाव और प्रशासनिक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव ने पार्टी के भीतर असंतोष को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य राज्य के विकास, राष्ट्रीय हित और देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम करना है। यहां याद दिला दें कि TMC पहले ही पश्चिम बंगाल में कथित असंतोष और बगावत की खबरों से जूझ रही है। कई नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताने के बाद अब संसदीय दल में भी असंतोष की चर्चा ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिल्ली से लेकर कोलकाता तक राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या यह केवल असंतोष है या फिर TMC के भीतर किसी बड़े राजनीतिक पुनर्गठन की शुरुआत?
राज्यसभा से भी आया झटका
इसी बीच राज्यसभा सांसद रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुये अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के लंबे दौर ने पार्टी के कई नेताओं को जमीनी हकीकत से दूर कर दिया है। रॉय ने कहा कि आम कार्यकर्ताओं की आवाज को लगातार नजरअंदाज किया गया, जिसका असर अब सामने दिखाई दे रहा है।
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