Giridih : सहारा छिन जाने के बाद से किसी तरह गुजर-बसर कर रही बेवा सोना और उसकी दो बेटी अंबिका और पूर्णिमा की जिंदगी में फरिश्ता बन कर BDO सुनील वर्मा एवं उप प्रमुख शेखर सुमन आये। पिता और दो जवान भाईयों को खो चुकी बहनों की सेहत इतनी बिगड़ चुकी थी कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। BDO की पहल पर दोनों बच्चियों को तुरंत गर्म पोशाक, कपड़े एवं पढ़ने-लिखने का सामान दिया गया। वहीं, इस परिवार को अविलंब मुर्गी पालन, दादी-बारी एवं पेंशन की योजना से जोड़ उन्हें लाभ देने का निर्देश दिया गया। बीते साल अप्रैल माह में इस परिवार के जवान बेटा संजय सिंह की चेन्नई में मौत हो गई थी। तब BDO सुनील वर्मा बढ़-चढ़कर इस परिवार का साथ दिया था, वहीं खुद पहल कर BDO और उप प्रमुख ने संजय सिंह के डेड बॉडी को चेन्नई से हवाई जहाज से मंगवाया था। अचानक इस परिवार के बारे में BDO के मन में ख्याल आया और पहुंच गये उसके चिताखारो गांव।
गांव जाने पर BDO को पता चला कि चिताखारो गांव में रहनेवाले वासुदेव सिंह के दो बेटे संजय सिंह और अजय सिंह थे। बड़े बेटे संजय की चेन्नई में मौत हो गई, वहीं छोटे बेटे अजय सिंह ने माली हालत खराब हो जाने के चलते सुसाइड कर लिया। अजय ने बीते साल 8 नवम्बर को खुदकुशी कर ली थी। दो जवान बेटे को खोने का सदमा पिता वासुदेव सिंह बर्दाश्त नहीं कर सके और वे भी चल बसे। वासुदेव की बेवा सोना की दो बेटी अंबिका और पूर्णिमा का सहारा छिन गया। इस परिवार की माली हालत बहुत खराब हो गई। खाने-पीने तक का पैसा नहीं था। इस ठंड में तन पर गर्म कपड़े तक नहीं थे। उनकी जिंदगी में BDO और उपप्रमुख के कदम पड़ते ही उनकी सोई तकदीर बदल गई। कुछ लोगों का कहना था कि भला हो BDO और प्रमुख बाबू का, जिसके चलते अब यह परिवार भूखे नहीं मरेगा।
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