Hazaribagh (Sunil Sahu) : ”पहले टीवी या फिल्मों में देखा करती थी कि कानून अंधा होता है, पर अब पूरा यकीन हो गया कि वाकई में कानून गरीबों की नहीं सुनता। जिसकी जेब में रिश्वत की चाभी होती है, वे कभी हवालात में बंद नहीं होते। मेरे आंखों के सामने मेरे जवान बेटे को एक रोज पहले मारा-पीटा गया और फिर दूसरे दिन बीच रोड में बेटे को मौत के घाट उतार दिया गया। हत्यारे इतने ताकतवर हैं कि उनका बाल तक बांका नहीं हुआ। नतीजा, जिस किसी ने यह भयानक सीन देखा, वे डर-भय कर जीने लगे। अगर मेरे बेटे के कातिलों को नहीं पकड़ा गया तो हम कानून के रखवालों के सामने अपनी जान दे देंगे। क्या यह घोर कलयुग नहीं?” यह कहना है एक दुखियारी मां सुनीता देवी और बाप तीतू मंडल का।
बेटे की सरेआम हुई हत्या से दुखी मां और पिता ने बताया कि उनका बेटा दिल्ली में सिविल सर्विसेस की तैयारी कर रहा था। कुछ रोज के लिये हजारीबाग अपने घर मध्य शिवपुरी आया था। उसके रहन-सहन और ठाट-बाट को देख कुछ दबंगों को वह खटकने लगा। लोहसिंघना के तत्कालीन थानेदार की मदद से उसे खूब टार्चर किया गया। इतना ही नहीं झूठा केस बनाकर उसे जेल भेज दिया गया। जिन लोगों की निगाहों में उनका बेटा खटकता रहा, वे लोग उसका पीछा नहीं छोड़े।
दुखियारी मां ने कहा कि एक रोज उसका बेटा उसके साथ दूध लेने गया, रास्ते में कुछ दबंगों ने रोक कर उसे बेतरह मारा-पीटा, कुछ लोग बीच बचाव कर उसे बचाये, लेकिन दूसरे ही दिन वंदना नर्सिग होम से पहले बीच रोड पर हरिओम जेनरल स्टोर के पास उनके जवान बेटे कृष्ण कुमार उर्फ मनमन मंडल को मौत के घाट उतार दिया गया। उसे मारने में पूर्व मुखिया से लेकर एक पुलिसवाले का बेटा और नाते-रिश्तेदार तक शामिल था। हत्यारों और हत्या के सूत्रधार तक के नाम और ठिकानों के बारे में थानेदार से लेकर SP तक को बताया गया, पर किसी का कुछ नहीं बिगड़ा। नेम्ड FIR तक दर्ज कराया, फिर भी गुजरे तीन माह में कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस की कार्यशैली से दुखी इस दंपत्ति ने अब DGP से गुहार लगाई है। वहीं पुलिस का कहना है कि नामजद सभी अभियुक्त फरार हैं, पुलिस उन्हें खोज रही है। सुनें क्या बोली मां सुनीता देवी और पिता तीतू मंडल…
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