राजस्थान : घर में शादी का माहौल था। हर कोई सज-संवरकर तैयार था। बारात भी आ चुकी थी। जयमाला भी हो चुका था। बाराती नाच गान कर खा-पी रहे थे। शादी की सभी रश्में शांतिपूर्ण तरीके से चल रही थी। अचानक से सात फेरों के समय लड़के के परिजनों ने लड़की के पिता से नगद और बाइक की मांग कर डाली। लड़की के पिता ने गुहार लगाई और कहा कि मैं एक गरीब किसान हूं, आपकी मांग कहां से पूरा कर सकता हूं। इसी बात को लेकर दोनों पक्ष में विवाद शुरू हो गया। लड़का पक्ष बिना दुल्हन लिए ही बारात लेकर वापस लौट गया। पीड़ित परिवार ने सामाजिक स्तर पर बारात को रोकने की काफी कोशिश की। मगर लड़का पक्ष के लोगों ने किसी की एक न सुनी और अपनी मांग पर अड़े रहे। इसके बाद पीड़ित परिजनों ने राजस्थान के सीकर जिला की जिले के एसपी और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
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पीड़ित दुल्हन का कहना है कि उसकी शादी तीन जुलाई को बुगाला गांव के रहने वाले अजय से हो रही थी। बारात हमारे गांव तारपुरा आई और सभी बारातियों ने खाना खाया और जब वरमाला की बारी आई तो लड़के के परिवार वालों ने कहा कि माला के साथ हर की चीज की व्यवस्था उन्हें की करनी होगी। फिर दुल्हन का भाई जल्दी से बाजार से वरमाला लेकर आया।
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दुल्हन ने बताया कि फेरों के समय दूल्हा अपने एक दोस्त के साथ बाहर चला गया और लड़के का पिता मेरे पिताजी से गाली-गलौच करने लगे। दुल्हन ने बताया कि लकड़े के पिता ने नगद, गहने और बाइक मिलेने पर ही फेरे कराने की जिद पर अड़ गए। मांग पूरी नहीं होने पर बारात लेकर लौट गए। दुल्हन ने आगे बताया कि इस संबंध में जब पुलिस में शिकायत दर्ज कराने गए तो वहां कहा गया कि लड़के ने अपनी मर्जी से शादी छोड़ी है, ऐसे में हम कुछ नहीं कर सकते।
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