New Delhi : भारतीय रेलवे ने अब सुरक्षा और परिचालन को और मजबूत बनाने के लिये कृत्रिम मेधा (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित कई आधुनिक तकनीकों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन नई प्रणालियों के जरिये ट्रेनों, पहियों, पटरियों और ओवरहेड उपकरणों की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी खराबी का तुरंत पता लगाया जा सकेगा। धुंध और खराब मौसम में लोको पायलटों को अक्सर दृश्यता की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसी को देखते हुये भारतीय रेल ने ‘ट्राई-नेत्र’ प्रणाली विकसित करने की पहल की है। इस प्रणाली में ऑप्टिकल कैमरे, इंफ्रारेड कैमरे, रडार और लिडार तकनीक शामिल होंगी। इनकी मदद से लोको पायलट को बेहतर दृश्यता और समय रहते चेतावनी मिल सकेगी। रेलवे ने मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम (MVIS) भी लागू करना शुरू किया है। यह AI आधारित सिस्टम चलती ट्रेनों के ढीले, लटके या गायब हिस्सों की पहचान करता है। तुरंत अधिकारियों को अलर्ट भेजता है। इस प्रणाली को Northeast Frontier Railway में 3 जगह, Dedicated Freight Corridor Corporation of India में 2 जगह एवं South East Central Railway में 1 जगह स्थापित किया गया है।
पहियों की खराबी पकड़ेंगे आधुनिक सेंसर
रेलवे ने ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिये कई और तकनीकी सिस्टम भी लगाये हैं, व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर (WILD) के 24 सिस्टम, ऑनलाइन मॉनिटरिंग ऑफ रोलिंग स्टॉक (OMRS) के 25 सिस्टम लगाये गये हैं। ये सिस्टम ट्रेनों के पहियों और अन्य हिस्सों में होने वाली खराबी का पहले ही पता लगा लेते हैं, जिससे हादसों की आशंका कम हो जाती है। केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने लोकसभा में बताया कि रेलवे ने माल और पार्सल ढुलाई को मजबूत बनाने के लिये ‘रेल पार्सल’ एप शुरू किया है। इस एप का परीक्षण फिलहाल हैदराबाद, विशाखापटनम, विजयवाड़ा, Guntur, Rajahmundry, Bengaluru, Chennai शहरों के 17 रेलवे स्टेशनों पर इसका परीक्षण चल रहा है।
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