Hazaribagh, Daru(Sunil Kumar) : ”बाबू, क्या बतायें, भोर में नींद खुलते ही पानी की चिंता सताने लगती है। कोसों दूर तालाब-पोखर या गड्ढे से पानी भरकर माथा में लाना पड़ता है। गांव में खंबे तो जरूर गड़े, पर लाइट कभी नहीं आई। रोड की हालत तो ऐसी है कि रात में किसी को प्रसव पीड़ा हो जाये तो रूह कांप उठती है। गांव में कोई पक्की सड़क नहीं है। पानी की बहुत दिक्कत है। गंदा पानी पीने के चलते कई रोग होते जा रहा है, किसी को पेट दर्द तो किसी को खुजली तो किसी को कुछ और।” यह दारूण कथा हजारीबाग के इचाक प्रखंड के धरधरवा गांव के लोगों की है।
मुस्लिम व आदिवासी बहुल इस धरधरवा गांव के मोहम्मद अब्बास, मो कादिर, मो निज़ाम, मो हुसैनी मिया, मो लालो मिया,अकरम, मोहम्मद रफीक, मोहम्मद साजिद और मोहम्मद ताहिर ने साझा तौर पर कहा कि “हर घर नल योजना” और “प्रधानमंत्री सड़क योजना” जैसे बड़े दावे इस गांव में फेल है। यहां के लोग हर रोज 2 से 3 किलोमीटर दूर जाकर पानी लाने को मजबूर हैं। दूषित पानी पीने के चलते गांव के बच्चों और बुजुर्गों को बीमारियों ने घेर लिया है। इस गांव में रहनेवाले हर किसी की जुबां पर बस यहीं दर्द है।
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