Ranchi(Akhilesh Kumar) : ”इसी गांव में मेरा जन्म हुआ, अब 70 साल का हो गया हूं, इस गांव में न लाइट है न पानी। रोड भी उबड़-खाबड़। कोई स्कूल-कॉलेज नहीं। रूह तो तब कांप उठती है जब रात में कोई बीमार पड़ जाये या किसी के पेट में दर्द शुरू हो जाये। कोसो दूर पैदल जाना पड़ता है। गांव के छौवा लोगों को 35 किलोमीटर दूर स्कूल-कॉलेज जाना पड़ता है। गांव में किसी के पास मोबाइल फोन तक नहीं है। न नेटवर्क है और न लाइट। MP और MLA का मुंह तक नहीं देखें हैं, वो कभी इस गांव में आते तब न उन्हें अपना दुख-दर्द बताते। गांव में बिजली नहीं रहने के चलते शाम होते ही सबके सब अपने अपने घरों में दुबक जाते हैं। डर-भय के चलते रात में बाहर नहीं निकलते। कभी-कभी जंगली जानवर टपक पड़ते हैं।” यह कहना है 70 साल के सोमरा उरांव का। चौंकाने और हैरत भरी बात यह है कि यह गांव राजधानी रांची से सटे नामकुम प्रखंड के लाली पंचायत में है। गांव का नाम टुंगरी टोली है। सोमरा उरांव इसी गांव में रहते हैं।
इस गांव में करीब 36 परिवार रहते हैं। एक भी पक्का मकान नहीं है। सबका खप्पड़पोश घर है। सुकरा उरांव ने बताया कि ढेरे दिन पहले पूर्व MLA रामकुमार पाहन इस गांव में आये थे, तभी भी गांव का कुछ भला नहीं हुआ, आज की तारीख में भी वहीं हाल है। वहीं, 12 वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा नमीता कुमारी का कहना है कि उसने कभी इस गांव में किसी नेता या अफसर को आते नहीं देखा। उसे 35 किलोमीटर दूर बुंडू पढ़ने के लिये जाना पड़ता है। इसमें करीब डेढ़ घंटे लग जाते। इसी गांव में रहनेवाले पारा शिक्षक दिगम्बर उरांव ने कहा कि बहुत दुख का बात है कि राजधानी रांची से सटे इस गांव का भला गुजरे 75 साल में नहीं हो सका। ढ़िबरी या दीया-बाती जलाकर बच्चों को पढ़ना पड़ता है। नामकुम के BDO तक को आवेदन दिया गया, पर बात आई गई हो गई। MP या MLA इस गांव में कभी नहीं आये। कोहरामलाइव ने इस गांव के लोगों का दर्द को जानने इस गांव में गये। अपने दुखों को बयां करते-करते गांव के लोगों के आंखों में आंसू छलक आये। सुने क्या बोले गांव के लोग…
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