Ramgarh(Prince Verma): बरसात की हर बूंद कभी रजरप्पा थाने की छत से टपकती थी। सीलन भरी दीवारें, उखड़ा हुआ फर्श और जर्जर कमरों में ड्यूटी निभाते जवानों की जिंदगी भी मानो उसी वीरानी का हिस्सा बन गई थी। लेकिन अब वही थाना नई चमक के साथ खड़ा है। यह बदलाव सिर्फ ईंट, सीमेंट और स्टील का नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच और जिम्मेदार नेतृत्व का नतीजा है। करीब 50 साल पुराने रजरप्पा थाना की तस्वीर बदलने का बीड़ा थानेदार कृष्ण कुमार ने उठाया। उन्होंने फाइलों से पहले अपने जवानों की जरूरतों को समझा और खुद जीर्णोद्धार की कमान संभाल ली।
अब है उजाला और भरोसा
थाने की मरम्मत के दौरान 17 बोरा सीमेंट, 15 स्टील शीट, रंग-रोगन, मजबूत फर्श, आधुनिक लाइटिंग और बारिश से बचाव के लिये नई छत की शीट लगाई गई। कभी अंधेरे और सीलन से घिरा रहने वाला थाना अब साफ-सुथरा, रोशन और व्यवस्थित नजर आता है। यहीं झारखंड पुलिस, जैप और मंदिर ओपी के करीब 25 जवान यहां ड्यूटी करते हैं, अब उनका कार्यस्थल पहले से कहीं अधिक बेहतर हो गया है। थानेदार कृष्ण कुमार ने बताया कि सिर्फ भवन ही नहीं, बल्कि जवानों की मेस की हालत भी बेहद खराब थी। इसे पूरी तरह दुरुस्त किया गया है ताकि जवान सम्मानजनक माहौल में पौष्टिक भोजन कर सकें। उन्होंने कहा, जवानों को बेहतर सुविधा देना मेरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। कुछ काम अभी बाकी हैं, जैसे रिकॉर्ड रूम का आधुनिकीकरण और परिसर का सौंदर्यीकरण। इन पर भी तेजी से काम चल रहा है। मैं खुद हर काम की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा हूं।
श्रमदान से बनी मिसाल
इस बदलाव की कहानी सिर्फ एक अधिकारी की नहीं, बल्कि पूरी टीम की है। मंदिर ओपी प्रभारी और जैप के जवानों ने भी श्रमदान कर इस अभियान को सफल बनाया। जवान कहते हैं, साहब ने हमें सिर्फ नई छत नहीं दी, बल्कि सम्मान दिया है। पहले यह जगह खंडहर जैसी लगती थी, अब घर जैसी महसूस होती है।”
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