दो महिला और एक नाइट गार्ड के भरोसे करोड़ों का सेंटर… देखें वीडियो

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Ranchi/Ormanjhi(Kuldeep Tiwari) : जिस स्वच्छता केंद्र को गांव-गांव में सफाई की नई संस्कृति लाने का माध्यम बताया गया था, आज वही केंद्र अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। रांची से सटे ओरमांझी प्रखंड के बरवे पंचायत के तहत डहु गांव के समीप करोड़ों रुपये की लागत से बना मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर अब सवालों के घेरे में है। कभी यहां से पूरे प्रखंड में स्वच्छता क्रांति की उम्मीद जगाई गई थी। कहा गया था कि हर पंचायत को ई-रिक्शा मिलेगा, घर-घर से प्लास्टिक और अन्य कचरा एकत्र होगा, फिर उसका वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन किया जायेगा। लेकिन हकीकत यह है कि आज यह केंद्र अपने मूल उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है।  जब इस स्वच्छता केंद्र का उद्घाटन हुआ था, तब जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को बताया गया था कि पंचायत स्तर पर ई-रिक्शा के माध्यम से कचरा संग्रहण की व्यवस्था विकसित की जायेगी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि इससे गांव साफ-सुथरे होंगे, वहीं, स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। लेकिन वर्षों बाद भी अधिकांश पंचायतों को ई-रिक्शा नहीं मिल पाया है।

वर्तमान में इस केंद्र में महज दो महिला मजदूर और एक नाइट गार्ड काम करते दिखाई देते हैं। कुछ मात्रा में कचरा संग्रहण जरूर हो रहा है, लेकिन जिस स्तर पर इस परियोजना को संचालित होना चाहिये था, वैसी कोई गतिविधि नजर नहीं आती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सेंटर का संचालन सिर्फ दिखावे के लिये किया जा रहा है। ओरमांझी पंचायत के मुखिया सह प्रखंड मुखिया संघ अध्यक्ष दीपक बड़ाईक ने गंभीर आरोप लगाते हुये कहा कि इस केंद्र का निर्माण पंचायतों से आने वाले सूखे और गीले कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिये किया गया था। लेकिन वर्तमान में पंचायतों से कचरा लाने के बजाय बाहर से कबाड़ खरीदकर लाया जा रहा है, जो योजना की मूल भावना के विपरीत है। उनका कहना है कि यदि यह आरोप सही है, तो करोड़ों रुपये की सरकारी योजना का उद्देश्य पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, केंद्र के संचालन से जुड़े लोगों का कहना है कि सेंटर तक पहुंचने वाली सड़क की स्थिति खराब है। इसी कारण नियमित रूप से कचरा संग्रहण और परिवहन में दिक्कतें आ रही हैं। उनके मुताबिक बेहतर सड़क सुविधा मिलने पर संचालन और प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। सबसे हैरान करने वाली तस्वीर यह है कि परिसर में कई ई-रिक्शा खड़े-खड़े जंग खाते और कबाड़ में तब्दील होते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब स्वच्छता अभियान को मजबूत बनाने के लिये इन वाहनों की खरीद की गई थी, तो आखिर उनका उपयोग क्यों नहीं हो रहा है? मुखिया दीपक बड़ाइक समेत कई जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वच्छता केंद्र का संचालन निर्धारित मानकों और सरकारी गाइडलाइन के अनुरूप होना चाहिये। ग्रामीणों का मानना है कि यदि पंचायतों को ई-रिक्शा उपलब्ध कराकर घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था शुरू कर दी जाये, तो पूरे क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हो सकती है।

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