Ranchi : वर्षों से वीरान पड़ी राजधानी रांची के कांके स्थित बेकन फैक्ट्री परिसर में गुरुवार को एक बार फिर नई उम्मीदों की आहट सुनाई दी। कभी राज्य की पहचान रही इस फैक्ट्री को अब आधुनिक तकनीक से लैस मांस प्रसंस्करण, शोध और प्रशिक्षण संस्थान के रूप में विकसित करने की संभावनायें तलाश की जा रही हैं। इसी सिलसिले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद की विशेषज्ञ टीम ने फैक्ट्री का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण दल का नेतृत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एस.बी. बारबुद्धे ने किया। उनके साथ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम. मथ्थू कुमार तथा मशीन एवं उपकरण विशेषज्ञ तन्नु भी मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने फैक्ट्री परिसर, भवनों, उपलब्ध संसाधनों और आधारभूत संरचनाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। इसके बाद संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा भी की गई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर का संस्थान बनने की संभावना
निरीक्षण के बाद विशेषज्ञों ने कहा कि कांके स्थित इस बंद पड़ी फैक्ट्री को अत्याधुनिक मांस प्रसंस्करण संस्थान के साथ-साथ शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यदि योजना को मूर्त रूप दिया जाता है तो यहां देश और विदेश में उपयोग होने वाली आधुनिक मशीनें एवं अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किये जा सकते हैं। इससे अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, वहीं, युवाओं के लिये प्रशिक्षण और रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे।
शोध, प्रशिक्षण और तकनीक का बनेगा केंद्र
प्रस्तावित योजना के तहत यह संस्थान मांस प्रसंस्करण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड में इस तरह का संस्थान विकसित होने से राज्य कृषि एवं पशुपालन आधारित उद्योगों के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है। निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों के साथ डॉ. देवनाथ चौरसिया, डॉ. नीरज वर्मा, डॉ. सुमति कुजूर, डॉ. समीर, दिनेश सहगल सहित अभियंत्रण विभाग के एसडीओ और जेई भी मौजूद रहे। सभी ने फैक्ट्री के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन किया और संभावित विकास योजनाओं पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार विशेषज्ञों की टीम शुक्रवार को भी फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण करेगी। इस दौरान तकनीकी पहलुओं, आवश्यक संसाधनों और संभावित परियोजना की रूपरेखा पर और विस्तार से विचार-विमर्श किया जायेगा।
वीरानी से विकास की ओर
कांके की यह बेकन फैक्ट्री लंबे समय से बंद पड़ी है और समय के साथ इसकी पहचान धुंधली पड़ती जा रही थी। लेकिन अब यदि विशेषज्ञों की सिफारिशों पर अमल होता है तो यह परिसर एक बार फिर गतिविधियों से गुलजार हो सकता है। कभी बंद दरवाजों और सन्नाटे के लिये पहचानी जाने वाली यह फैक्ट्री आने वाले दिनों में शोध, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक का बड़ा केंद्र बन जाये, तो यह झारखंड के लिये एक नई शुरुआत साबित हो सकती है।
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