Kohramlive : छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा–बीजापुर के जंगलों में जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां आज समर्पण की आवाज सुनाई दी। बीजापुर में 34 नक्सलियों ने एक साथ हथियार डाल दिये। इनमें 26 नक्सली ऐसे थे, जिन पर कुल 84 लाख रुपये का ईनाम घोषित था। इसमें 7 महिलाएं भी शामिल हैं। ये सभी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC), तेलंगाना स्टेट कमेटी एवं आंध्र-ओडिशा बॉर्डर डिवीजन में सक्रिय रहे हैं। सरेंडर करने वालों में पांड्रू पुनेम, रुकनी हेमला, देवा उइका, रामलाल पोयम, मोटू पुनेम शामिल हैं। इन सभी पर 8-8 लाख रुपये का ईनाम था। यह आत्मसमर्पण आला पुलिस अधिकारी और CRPF अधिकारियों के सामने राज्य सरकार की ‘पुना मार्गेम’ (पुनर्वास से सामाजिक पुनर्स्थापन) पहल के तहत हुआ। बीजापुर SP जितेंद्र यादव ने मीडिया को बताया कि हर सरेंडर करने वाले को तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण एवं रोजगार और पुनर्वास से जुड़ी अन्य सुविधायें दी जायेंगी। SP यादव के मुताबिक, “सरेंडर करने वाले कैडरों के परिवार भी चाहते हैं कि वे हिंसा छोड़कर सामान्य और सम्मानजनक जीवन जियें।” सरकार की पुनर्वास नीति का असर साफ है गुजरे दो वर्षों में सिर्फ दंतेवाड़ा जिले में 824 नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।
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