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WMO की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, 34 साल में दोगुनी हुई गर्मी की रफ्तार…

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Kohramlive : कभी बर्फीले पहाड़ों, घने जंगलों और जीवनदायिनी नदियों के लिये पहचाना जाने वाला एशिया अब जलवायु परिवर्तन की सबसे भयावह मार झेल रहा है। मौसम का मिजाज इस कदर बदल रहा है कि कहीं धरती आग उगल रही है तो कहीं आसमान आफत बनकर टूट रहा है। यही वजह है कि विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इसी साल 17 जून को जारी ‘स्टेट ऑफ द क्लाइमेट इन एशिया 2025’ रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया का तापमान वैश्विक औसत की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले वर्षों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।

34 साल में दोगुनी हुई गर्मी की रफ्तार

रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 1991 से 2025 के बीच एशिया में तापमान बढ़ने की गति 1961 से 1990 के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई है। इसका असर वर्ष 2025 में साफ दिखाई दिया, जो एशिया के इतिहास का दूसरा सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया। जापान, चीन और दक्षिण कोरिया में लोगों ने रिकॉर्डतोड़ गर्मी झेली। वहीं मध्य और पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में महीनों तक लू का प्रकोप जारी रहा। गर्म हवाओं ने जनजीवन को बेहाल कर दिया और जल संकट को और गहरा कर दिया।

भारत भी नहीं बचा

जलवायु संकट का असर भारत में भी साफ दिखाई दिया। कई राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी। गर्म हवाओं और बढ़ते तापमान ने लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाला। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़े, वहीं किसानों की फसलें भी प्रभावित हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में लगातार हो रही वृद्धि भविष्य में खाद्य सुरक्षा और जल संसाधनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

कजाकिस्तान में 40 डिग्री पार पहुंचा पारा

जलवायु परिवर्तन का सबसे खतरनाक चेहरा कजाकिस्तान में देखने को मिला। यहां कुछ महीनों में तापमान सामान्य से 14 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। कई दिनों तक पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना रहा। दक्षिण कोरिया में भीषण गर्मी और सूखे ने जंगलों को आग की लपटों में झोंक दिया। इसे देश के इतिहास की सबसे बड़ी वनाग्नि घटनाओं में शामिल किया जा रहा है।

कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा, एशिया ने देखा सबसे विकराल रूप

साल 2025 केवल गर्मी के लिये ही नहीं, बल्कि चरम मौसमीय घटनाओं के लिये भी याद किया जायेगा। दक्षिण एशिया में असामान्य और अत्यधिक मानसूनी बारिश हुई, जबकि पश्चिम और मध्य एशिया के कई देशों को सूखे की मार झेलनी पड़ी। पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी। इस आपदा में एक हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 30 लाख लोग बेघर हो गये। वियतनाम में बाढ़ ने 200 लोगों की जान ले ली और देश को 1.9 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।

चक्रवात और सूखे ने बढ़ाई मुश्किलें

चक्रवात सेन्यार ने थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया में भारी तबाही मचाई। तेज हवाओं और मूसलधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। वहीं ईरान समेत कई देशों में लंबे समय तक सूखे का दौर जारी रहा। जल स्रोत सिकुड़ते गये और लोगों के सामने पेयजल संकट गहराता चला गया। WMO की यह रिपोर्ट पूरे एशिया के लिये खतरे की घंटी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। यदि कार्बन उत्सर्जन कम करने, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाये गये तो आने वाले वर्षों में एशिया को और अधिक भीषण गर्मी, बाढ़, सूखा और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है।

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