कोहराम लाइव डेस्क : मृतक के जमा Sperm पर उसकी पत्नी का ही होगा अधिकार। यह फैसला कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट ने मृतक के पिता की दावेदारी को ठुकरा दिया है। यह फैसला सुनाया है कलकत्ता हाईकोर्ट ने।
क्या था मामला
देश में सबसे पहली बार साल 2009 में दिवंगत पति के शुक्राणु से किसी भारतीय महिला को संतान सुख का प्राप्ति हुई थी। पति की मौत के बाद पूजा नाम की महिला गर्भवती हुई और एक लड़के को जन्म दिया। पूजा ने अपने पति के राजीव के संरक्षित किए गए शुक्राणुओं की मदद से गर्भधारण किया था।
साल 2006 में पूजा के पति की मौत हो गई थी। दो साल बाद पूजा को इस बात की जानकारी मिली कि उनके पति ने अपने शुक्राणु एक अस्पताल में संरक्षित कर रखे हुए हैं। पूजा ने डॉक्टरों से संपर्क किया और वकीलों ने इस बारे में कानूनी सलाह ली। इसके बाद डॉक्टर ने पूजा का इलाज शुरू किया और वह गर्भवती हो गई।
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Sperm दिल्ली के अस्पताल में सुरक्षित था
अदालत ने कहा कि दिल्ली के एक अस्पताल में रखे गए शुक्राणु मृतक के हैं और क्योंकि मृत्यु तक वे दोनों वैवाहिक संबंध में थे, इसलिए इन शुक्राणु पर मृतक के अलावा उनकी पत्नी का अधिकार रहेगा। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उनका बेटा थैलेसीमिया का मरीज था। भविष्य में उपयोग के लिए मृतक ने अपने शुक्राणुओं को दिल्ली के एक अस्पताल में सुरक्षित रखा था।
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पिता ने दावेदारी की थी
कलकत्ता उच्च न्यायालय में राजीव के पिता ने उसके स्पर्म पर अपनी दावेदारी की थी। इसी पर सुनवाई चल रही थी। मामले में अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास अपने बेटे के संरक्षित शुक्राणु रखने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनके बेटे की विधवा को इस मामले में नो ऑब्जेक्शन के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए, अगर ये नहीं तो कम से कम उसके अनुरोध का जवाब देना चाहिए। हालांकि अदालत ने वकील के इस अनुरोध को खारिज कर दिया है।








